'असत्य के साथ समझौते से अच्छा है कि उस मृत्यु का वरण कर लिया जाए जो राष्ट्र की अस्मिता को समर्पित हो। अन्याय मुझे विवश कैसे कर लेगा? मैं आर्य पुत्र हूं, मैं अमृत पुत्र हूं। सत्य लिखना मेरा धर्म है, कलम मेरा ईमान है। मेरे पूज्य दादा और पंजाब केसरी के संस्थापक अमर शहीद लाला जगत नारायण जी ने मुझसे कहा था कि कथनी और करनी में अंतर न हो, मैं सत्य पथ का पथिक हूं। आगे मेरा जो प्रारब्ध है, मुझे स्वीकार है।'
परम पूजनीय पिताश्री अमर शहीद रमेश चंद्र जी भी मुझे हमेशा ही सत्य पथ से कभी विचलित नहीं होने की प्रेरणा देते रहे। पंजाब में आतंकवाद का दौर, सीमा पार के षड्यंत्र, विफल होते प्रशासन, बिकती प्रतिबद्धताएं और लगातार मिल रहीं धमकियों के बीच पितामह और पिताश्री ने शहादत का ही मार्ग चुना। उन्हीं की प्रेरणा और उन्हीं के विचारों को साकार करने के लिए पंजाब केसरी ने सत्य का मार्ग चुना। शहीद लाला जगत नारायण और रमेश चंद्र जी के नाम पर जे.आर. मीडिया इंस्टीट्यूट का उद्देश्य उनके विचारों को मूर्तरूप देना है। समाज, मीडिया और नैतिकता तीनों में अंतर्संबंध है। वर्तमान में यद्यपि इनमें काफी मिलावट हो चुकी है, मैं समझता हूं कि अगर समाज, मीडिया और नैतिकता में अंतर्विरोध व्यापक रूप से प्रकट हुआ तो यह राष्ट्र और लोकतंत्र के भविष्य के लिए अशुभ होगा। हमारी संस्कृति का आधार ही नैतिकता है, इसलिए हमें भविष्य के लिए ऐसे पत्रकार तैयार करने होंगे, जो नैतिक और मानवीय मूल्यों का सम्मान करते हों और अग्निपथ पर भी विचलित हुए बिना चल सकें।
बाजारवाद आज का कटु सत्य है, लेकिन जरूरत न तो उसके सामने आत्मसमर्पण की है और न ही उसके धुर विरोध की है। पत्रकारिता की मुख्य भूमिका सत्य का अनुगामी होते हुए जन पक्ष में रहने की है और किसी भी रूप को अपनाते हुए अपनी इस बुनियादी भूमिका को नहीं छोड़ा जा सकता।
आइए! जे.आर. मीडिया इंस्टीट्यूट के जरिए हम सत्य पथिकों की तलाश करें, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के साथ-साथ नए आयाम भी स्थापित करें। उनके कथ्य ईमानदार हों और निहित स्वार्थों से संचालित न हों। कथ्य और शैली दोनों ही पत्रकार की सच्चाई पर निर्भर करती हैं।
अश्विनी कुमार
सी.एम.डी
जे. आर. मीडिया इंस्टीट्यूट
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