शख्सियत
Date :07-April-2012
 
हैल्थ पालिसी में बदलाव जरूरी : स्वाति पीरामल
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वह स्वभाव से विनम्र हैं एवं अपने प्रोफेशन के प्रति गंभीर एवं समर्पित हैं। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने स्वाति ए.पीरामल को उनके टे्रड और इंडस्ट्री में श्रेष्ठ योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया है। वह 'एसोचैम' की पहली महिला अध्यक्ष रही हैं। उनका आठ बार नामांकन 25 मोस्ट पावरफुल वूमैन लिस्ट में हुआ है।
स्वाति ए.पीरामल ने अपने पति के साथ केवल 18 करोड़ रुपए के निवेश से बिजनेस की शुरूआत की थी। करीब दो साल पहले उन्होंने अपने 350 प्रोडक्ट्स को 17,000 करोड़ रुपए में बेचा है। अब उनका ग्रुप डिफेंस, रियल एस्टेट एवं फाइनेंशियल सर्विसिज की तरफ रुख करने के प्लान में है। इसके अलावा वोडाफोन में उनके दस फीसदी यानि 11,000 करोड़ रुपए के स्टेक हैं। राजधानी में पद्मश्री से सम्मानित एवं पीरामल हैल्थकेयर डायरेक्टर स्वाति ए.पीरामल से लिए गए विशेष साक्षात्कर के अंश इस प्रकार हैं:
प्रश्न : आपका मेडिकल डाक्टर से मेडिकल हैल्थकेयर व्यवसाय में जाने का क्या प्रेरणा स्रोत था?
उतर : मैं पहले से डाक्टर थी एवं 1998 में हमने निकालस कंपनी खरीदी। उसकी मैं मेडिकल डायरेक्टर बनी। इसके अलावा 2000 में हमने एक और 100 साइंटिस्ट वाली कंपनी खरीदी। मेरी प्रेरणा स्रोत की वजह एक पोलियो से ग्रसित छोटी सी बच्ची बनी। यह मुम्बई के परेल इलाके में टैक्सटाइल के औद्योगिक इलाके में थी। 1982 में मैंने अपाहिज बच्चों के लिए अस्पताल शुरू किया। इस तरह से मेरा हैल्थकेयर की तरफ एक रुझान परिवर्तित हुआ जिससे बदलाव हुआ। इस एरिया में पोलियो से ग्रसित बहुत से बच्चे थे, लेकिन हमने कड़ी मेहनत करके इस इलाके को पोलियो मुक्त बनाया। यह पब्लिक हैल्थ के लिए काम करने का एक अच्छा मार्ग था।
प्रश्न : देश में स्वास्थ्य सैक्टर बहुत उपेक्षित है, इसमें सुधार के लिए क्या रणनीति सरकार को अपनानी चाहिए?
उत्तर : वास्तव में हमें अपनी हैल्थ पालिसी में बदलाव की जरूरत है। जो हैल्थ पालिसी देश की आजादी से पहले की लिखी हुई है वह बहुत पुरानी हो गई है और इस आधुनिक परिवेश में फिट नहीं है। उदाहरण के तौर पर टेलीफोन पर हम डाक्टर की सहायता इलाज के लिए ले सकते हैं पर कानून के तहत इसकी अनुमति नहीं है। हमें इस तरह के कानून में बदलाव की जरूरत है, क्योंकि देश के ग्रामीण इलाकों में जहां डाक्टर नहीं हैं, वहां इस तरह की संचार व्यवस्था से मेडिकल सहायता दी जा सकती है क्योंकि 100 केसों में चार-पांच केस ही थोड़े मुश्किल होते हैं, ज्यादातर तो संचार के माध्यम से भी सुलझाए जा सकते हैं।
प्रश्न : हैल्थ पालिसी में सबसे ज्यादा बदलाव क्या होना चाहिए?
उत्तर : देखिए, देश के 80,000 गांव में डाक्टर ही नहीं हैं। डाक्टरों की यहां बहुत कमी है। इसलिए हमें दूरदराज ग्रामीण इलाकों में मेडिकल सहायता हेतु बहुत काम करने की जरूरत है। इसलिए हमें इन दूरदराज इलाकों में मेडिकल सहायता देने के लिए दूरसंचार, मोबाइल हैल्थ सेवाएं देने की आवश्यकता है।
प्रश्न : देश में वर्तमान बजट में क्या हैल्थ सैक्टर के प्रस्ताव पर्याप्त हैं या इनमें अभी भी ज्यादा कुछ देने की आवश्यकता है?
उत्तर : प्रधानमंत्री ने कहा है कि हैल्थ केयर स्टैंडिंग की बढ़ौतरी की जाएगी, पर वास्तव में ऐसा देखने में नहीं आया है। आप इस नजरिये से नहीं देखते हैं।
प्रश्न : हैल्थ सैक्टर में अनुसंधान एवं विकास (आर एण्ड डी) की देश में बहुत कमी है। सरकार की इस बारे क्या सोच रहनी जरूरी है?
उत्तर : देश में रिसर्च और डवेलपमेंट में तो बहुत ही कमी है। इसमें अपनी स्टैंडिंग बहुत कम है। इसमें 'माइंडसैट' भी नहीं है कि इसमें हम कुछ कर सकते हैं। उदाहरण के तौर में हमारे यहां हार्ट अटैक पचास साल पर हो जाता है, जबकि पश्चिमी देशों में यह अस्सी साल पर होता है। 30-40 सालों का यह नुक्सान इतनी युवा उम्र में क्यूं हो रहा है? इस बारे में क्या हो सकता है? मेडिसन में क्या नई खोज हो सकती है? इस तरह की बातों पर तो रिसर्च है ही नहीं। हमें बहुत ज्यादा काम हैल्थ इंडीकेटर को इसमें शामिल करने बारे करना है।
प्रश्न : सरकारी अस्पतालों में अभी भी आम आदमी को एक स्तर पर अच्छा इलाज नहीं मिल रहा है। इस बारे में केन्द्र एवं राज्य सरकारों के बीच क्या असंतुलन समझा जाए?
उत्तर : सेवाओं का संंबंधित इलाके में होना बहुत जरूरी है। आम आदमी को सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिएं। हम इसे कैसे करें, यह सवाल है। इसे टैक्नोलाजी, साफ्टवेयर, टेलीकाम के माध्यम से हम अच्छा कर सकते हैं।
प्रश्न : जब से फाइव स्टार, अस्पताल का कल्चर देश में आया है। इससे आम आदमी को इस तरह की मेडिकल सहायता मिलनी लगभग असंभव हो गई है। क्या आपको लगता नहीं कि मेडिकल प्रोफेशन अब एक 'नोबल प्रोफेशन' से प्रोफेशनल हो रहा है?
उत्तर : मैं ऐसा नहीं समझती हूं। डाक्टर रात-दिन काम करते हैं। कोई डाक्टर मैनेजमेंट में जाता है, तो नौ से पांच बजे आफिस में काम करते हैं। उन्हें तन्ख्वाह भी बहुत कम मिलती है। सरकारी अस्पतालों में तो तन्ख्वाह बहुत ही कम है। मुझे लगता है कि दूसरे व्यवसायों में लोगों को ज्यादा पैसा मिल रहा है, इसलिए मेडिकल में बहुत कम लोग जा रहे हैं। हमारे देश में डाक्टरों की बहुत कमी है। हमारा आधारभूत ढांचा भी बहुत कम है। हमें इसमें बदलाव लाने की जरूरत है, ताकि मेडिकल सहायता में बढ़ौतरी हो सके।

 
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