शख्सियत
Date :02-June-2012
 
अडवानी जी के सुझाव सिर-आंखों पर : मुख्तार अब्बास नकवी
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भाजपा अभी येदियुरप्पा और नरेन्द्र मोदी-संजय जोशी प्रकरण से उभरी ही थी कि भाजपा के वरिष्ठï नेता लालकृष्ण अडवानी का 'ब्लॉग बम' भारत बन्द आह्वान के दौरान भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के कैम्प पर गिर गया। आखिर 2014 के लोकसभा चुनाव पर सबकी नज़र है। सबकी महत्वाकांक्षाएं यूपीए के गिरते ग्राफ के कारण उभर रही हैं। आर.एस.एस. के खासमखास नितिन गडकरी 'कई' तरफ से सियासी निशाने पर हैं। पर ये आन्तरिक लड़ाइयां अब उभर कर सतह पर आ रही हैं, जो 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा की सेहत के लिए अच्छा संकेत नहीं है। आर.एस.एस. अब युवाओं को अधिमान देने की राह पर है। पर सवाल यह है कि क्या गडकरी 2014 तक सब खेमों को साथ लेकर चलने में कामयाब होंगे? क्या भाजपा लीडरों की नाराजगियां मीडिया में जाने का नुक्सान चुनावों में नहीं होगा? आखिर एनडीए के घटक दलों का दायरा क्यूं नहीं बढ़ पा रहा है, जबकि यूपीए से लोग महंगाई से परेशान हैं? भाजपा एवं एनडीए सर्वसहमति से राष्ट्रपति चुनाव की राह में जाएगी या अपना उम्मीदवार खड़ा करेगी?
इस सन्दर्भ में राजधानी में भाजपा उपाध्यक्ष एवं पार्टी चुनाव प्रबन्धन प्रभारी मुख्तार अब्बास नकवी से लिए गए विशेष साक्षात्कार के अंश इस प्रकार हैं :—
प्रश्र : एनडीए के भारत बन्द को आम आदमी के साथ किस तरह से जोड़ कर देखते हैं?
उत्तर : एनडीए द्वारा आयोजित किया गया भारत बन्द अद्भुत एवं शानदार था। देश की गलियों, चौराहों, खेत-खलिहानों से लोगों का इसमें भाग लेना इस बात का प्रतीक है कि सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आक्रोश तो है ही, लेकिन सरकार के प्रति उनका विश्वास भी खत्म हो गया है। जिस तरह से केन्द्र सरकार महंगाई माफिया से सांठगांठ करके महंगाई की मार से लोगों को मारने में लगी हुई है, तेल की बेतहाशा बढ़ती कीमतें उसी का एक हिस्सा हैं। भारत एशिया का ऐसा देश है जहां पैट्रोल, डीज़ल एवं एलपीजी पर सबसे ज्यादा कीमत आम आदमी अदा करता है। उस पर सरकार 150 हजार करोड़ रुपया प्रति वर्ष आम आदमी से टैक्स के रूप में वसूलती है। इसलिए यह लोगों का आक्रोश केन्द्र सरकार के भ्रष्टाचार के रूप में आखिरी कील साबित होगा।
प्रश्र : जिस तरह यूपीए सरकार महंगाई से परेशान हो रही है। दूसरी तरफ एनडीए का नेतृत्व करने वाली भाजपा में नरेन्द्र मोदी-संजय जोशी प्रकरण, येदियुरप्पा प्रकरण एवं इसके बाद नितिन गडकरी पर अडवानी का 'ब्लाग बम' गिर गया है। इससे क्या देश के लोगों में नकारात्मक संदेश नहीं जाएगा?
उत्तर : नहीं ! मैं मानता हूं कि यह प्रकरण किसी भी लोकतांत्रिक पार्टी में हो सकता है क्योंकि हमारी लोकतांत्रिक पार्टी है। अन्य पार्टियां पारिवारिक पार्टियां हैं। उसमें थोड़ा फर्क होगा। हमारी पार्टी लोकतांत्रिक पार्टी है इसलिए संगठन के फोरम पर इस तरह की बात आ सकती है एवं उठ सकती है लेकिन मैं मानता हूं कि देश हमारी तरफ बड़ी उम्मीद से देख रहा है। हमें कोशिश करनी चाहिए कि देश के सरोकार, जनता की समस्याएं एवं देश के सामने जो चुनौतियां हैं, उन चुनौतियों को प्राथमिकता के आधार पर लेकर आगे बढ़ें और इस तरह की बातें जो मीडिया में सुर्खियां बनती हैं, उनको दरकिनार करने की जरूरत है।
प्रश्र : जिस तरह से भाजपा लीडर सुषमा स्वराज की नाराजगी उभरी थी, अब अडवानी 'ब्लाग बम' उसी सीरिज की पराकाष्ठा है?
उत्तर : नहीं! मैं इसे इस रूप में नहीं देखता हूं और मैं इसको कोई बहुत ज्यादा, कि पार्टी में कोई बहुत बड़ा मतभेद है, ऐसा नहीं है। लालकृष्ण अडवानी पार्टी के बहुत वरिष्ठ नेता हैं। हमारे मार्गदर्शक हैं और उनके सुझाव और उनके पार्टी को दिए गए सुझाव सदा हमारे सिर-आंखों पर रहे हैं। जो भी वह कहते हैं, वह पार्टी और देशहित को साथ में रखकर कहते हैं।
प्रश्र : लेकिन जिस तरह से भाजपा लीडर अडवानी ने भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के 'नाकारा' पर भारी चोट की है, क्या यह अडवानी की महत्वाकांक्षा है या कुछ और?
उत्तर : नहीं! यह कहना बिल्कुल गलत है। मैं इससे ज्यादा इस पर कुछ और बात करना उचित नहीं समझता हूं।
प्रश्र : जब यूपीए सरकार के खिलाफ जनता का आक्रोश है, तो एनडीए के साथ और पार्टियां क्यों नहीं जुड़ रहीं हैं यानी विस्तार नहीं हो पा रहा है?
उत्तर : देखिए! यह एनडीए का विस्तार काफी हद तक होगा और जिस तरह से कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए यानी 'उल्टा पुल्टा अलायंस' का भ्रष्टाचार का जहाज डूबने की कगार पर है, उसके घटक दल उस डूबते जहाज से निकलने के लिए तड़प रहे हैं। मैं मानता हूं कि एनडीए का विस्तार चुनाव के नजदीक बड़े पैमाने पर होगा और कुछ चुनाव से पहले सहयोगी होंगे, कुछ चुनाव के बाद लेकिन भाजपा एवं जो हमारे वर्तमान सहयोगी दल हैं, हमारी पूरी कोशिश होगी कि भारी बहुमत के साथ केन्द्र में सरकार बनाएंगे।
प्रश्र : इस साल के विधानसभा के चुनाव से लेकर अगले लोकसभा चुनाव तक सीधे भाजपा एवं कांग्रेस में टक्कर होगी। क्या तब तक आपसी मतभेद खत्म होने की कोई सम्भावना है?
उत्तर : अगले लोकसभा चुनाव तक ग्यारह राज्यों के चुनाव होने वाले हैं। इस वर्ष गुजरात एवं हिमाचल में है। यह सभी चुनाव हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। जहां हम सत्ता में हैं, वहां हम सत्ता में वापिसी करेंगे, जहां जैसे दिल्ली, राजस्थान में सत्ता नहीं है वहां हम सरकार बनाएंगे। लोगों के समर्थन की अभिव्यक्ति उसमें दिखेगी। यह बात सही है कि अधिकांश राज्यों में हमारा सीधा मुकाबला होने वाला है। हमें यूपीए की दिशाहीन नीतियों एवं नेतृत्वहीनता का फायदा मिलेगा।
प्रश्र : राष्ट्रपति चुनाव बार भाजपा की क्या रणनीति है, क्योंकि मुम्बई बैठक के बाद एनडीए की इस बारे में रणनीति पर चर्चा होने की योजना थी?
उत्तर : देखिए! राष्ट्रपति के चुनाव में जो अभी तक की परम्परा है कि सत्तापक्ष कोई नाम विपक्ष के सामने रखता है। अभी तक न कांग्रेस पार्टी ने और न ही यूपीए ने, किसी ने भी नाम को अन्तिम रूप नहीं दिया है। हम चाहते हैं कि राष्ट्रपति का चुनाव आम सहमति से हो और सर्वसम्मति से हो लेकिन यह निर्भर करता है कि यूपीए इस चुनाव को किस दिशा में ले जाती है। वह चुनाव के रास्ते पर जाएंगे या सर्व सहमति के रास्ते पर जाएंगे।
प्रश्र : क्या आपको लगता है कि राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति चुनाव बारे एक-एक पद यूपीए-एनडीए में बंटवारे पर सहमति हो जाए?
उत्तर : अभी तक औपचारिक तौर पर हमसे यूपीए की तरफ से किसी ने बात नहीं की है। अभी वह अगर कोई औपचारिक तौर पर बात करने के लिए कोई सामने पैनल लाएंगे। अगर उनका पैनल का नाम देशहित में और अच्छा नाम हुआ, तो निश्चित तौर पर एनडीए को कोई ऐतराज नहीं होगा लेकिन कोई नाम ऐसा हुआ, जो गले उतरने वाला नहीं होगा, तो निश्चित तौर पर एनडीए सोचेगा।
प्रश्र : चर्चा है कि फिल्म स्टार जयाप्रदा भाजपा में शामिल होकर रामपुर लोकसभा सीट से चुनाव लडऩा चाहती हैं एवं आपसे बात हो गई है। इसमें कितनी सच्चाई है?
उत्तर : नहीं! अभी मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना है। इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। जब ऐसी कोई बात होगी, तो उसकी जानकारी सबको मिलेगी।

 
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