राष्ट्रपति का चुनाव सरगर्मियों पर है। आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। हालांकि यूपीए-एनडीए दोनों मानते हैं कि यह साधारण चुनाव नहीं है, इसकी गरिमा रखी जानी चाहिए, लेकिन यह चुनाव स्तर से नीचे जाता प्रतीत हो रहा है। इसके सारे समीकरण 2014 लोकसभा चुनाव की तरफ जाते संकेत दे रहे हैं। एक-दूसरे के खेमों में सेंध लगाने की कोशिश की जा रही है।
अब सवाल उठता है कि क्या एनडीए की तरफ से यूपीए के समर्थन में 'कुछ' सांसदों-विधायकों की क्रास वोटिंग हो सकती है? क्या यूपीए मंत्री अगाथा संगमा पर चुनाव के बाद कार्यवाही के आसार हैं? जब सब पार्टियां राष्ट्रपति चुनाव को गरिमामय चुनाव मानती हैं तो स्तर से नीचे चुनावी खेल क्यूं।
राजधानी में भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर से विशेष साक्षात्कार के अंश इस प्रकार हैं:-
प्रश्र : पी. संगमा द्वारा उठाए गए जनजातीय मुद्दे पर राष्टï्रपति उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि राष्ट्रपति चुनाव को साधारण न बनाया जाए, क्योंकि इसका महत्व एवं कद है। आपका क्या मानना है?
उत्तर : मेरा इस बारे में कहना है कि प्रणव मुखर्जी और कांग्रेस पार्टी कोई भी सार्थक चर्चा टालना चाहते हैं। हम राष्ट्रीय मुद्दे उठाना चाहते हैं। इसलिए हमने खुली चुनौती दी है कि टेलीविजन चर्चा भी हो। लेकिन वह उसको मना कर रहे हैं। अब यह बहाना बनाने लगे हैं कि राष्ट्रपति पद का महत्व है ही नहीं। यहां तक उनका तर्क गया है। इसलिए कांग्रेस को इसका पता नहीं है एवं बहाने ढूंढ रही है और चर्चा टालने में लगी है।
प्रश्र : लेकिन एनडीए ने प्रणव मुखर्जी के हस्ताक्षर को फर्जी करार देकर चुनाव को क्या निचले स्तर पर नहीं ले गई है? इसे कोर्ट में ले जाने की भी तैयारी है?
उत्तर : कोर्ट के बारे में नहीं कहा है। जो आपत्ति थी, वह नियम के मुताबिक ही ली है। चुनाव प्रक्रिया का एक हिस्सा है। जब तकनीकी जांच होती है, जिसे 'वैरीफिकेशन' कहते हैं। पड़ताल के वक्त किसी को आपत्ति उठाने का अधिकार है। रिटर्निंग आफिसर ने भी तब यह नहीं कहा था कि आपको आपत्ति उठाने का अधिकार नहीं है।
प्रश्र : यूपीए मंत्री अगाथा संगमा के अपने पिता एवं एनडीए राष्ट्रपति उम्मीदवार पी. संगमा के पक्ष में जनजातीय क्षेत्रों में प्रचार करने की चर्चा हो रही है। क्या अगाथा भाजपा के सम्पर्क में है या भाजपा में इस चुनाव के बाद शामिल हो सकती हैं?
उत्तर : पी. संगमा भी भाजपा में नहीं आए हैं, तो अगाथा की कहां पर बात आ गई? हमने पी. संगमा की उम्मीदवारी का समर्थन किया है।
प्रश्र : यूपीए ने एनडीए के घटक दलों खासकर शिवसेना एवं जनता दल (यू) राष्ट्रपति उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी के पक्ष में समर्थन हासिल किया है जिससे एनडीए की एकजुटता को धक्का लगा है। क्या आगे आने वाले वक्त में एनडीए की छवि को नुक्सान नहीं है?
उत्तर : बिल्कुल नहीं। क्योंकि यह चुनाव कोई आम चुनाव नहीं है। शिवसेना ने पहले ही यह ऐलान कर दिया है कि वह उपराष्ट्रपति के चुनाव में एनडीए के साथ रहेगी। यह जेडी (यू) ने भी कहा है कि एनडीए के साथ सशक्त है एवं एकजुटता है। एक-आधा विषय में कोई मतभेद हो सकते हैं। वहां (यूपीए) भी क्या हुआ है? अभी तक ममता बनर्जी ने बात नहीं की है। वे तो यूपीए मंत्रिमंडल में शामिल हैं। तृणमूल कांग्रेस ने अभी तक अपनी भूमिका स्पष्ट नहीं की है। यूपीए में भी कहां एकजुटता है। वामपंथियों के भी दो दल वोङ्क्षटग में हिस्सा नहीं लेने वाले हैं तो इसका कोई महत्व नहीं है।
प्रश्र : लेकिन जिस तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बयानबाजी के बाद पासा प्रणव मुखर्जी की तरफ बदला है तो क्या एनडीए की यह टूट प्रधानमंत्री पद की महत्वाकांक्षा की राजनीति समझी जाए?
उत्तर : नहीं यह कोई मुद्दा ही नहीं था। वामपंथियों एवं तृणमूल कांग्रेस का, नरेन्द्र मोदी का क्या मुद्दा है? यूपीए क्यों टूटी? यही कोई नरेन्द्र मोदी के मुद्दे पर थोड़े ही टूटे हैं? इसके अलावा शिवसेना तो नरेन्द्र मोदी का स्वागत करती है। वह क्यों अलग होगी? तो यह कोई मुद्दा नहीं था। देखिए। पी. संगमा कोई एनडीए के बैनर तले खड़े नहीं हैं। एनडीए ने उनका समर्थन किया है। इसमें हर घटक दल अलग-अलग राय रखता है। इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। क्योंकि उस तरफ से यूपीए भी एकजुट नहीं रही है।
प्रश्र : क्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एनडीए के सम्पर्क में हैं?
उत्तर : यह सवाल कहां उठता है? सिर्फ पी. संगमा उनको जाकर मिले हैं। पी. संगमा एक स्वतंत्र उम्मीदवार हैं। उनको जेडी (यू) एवं बीजेडी ने स्पांसर किया है और बीजेपी और अकाली दल ने समर्थन दिया है। अन्य दलों ने भी समर्थन दिया है। ऐसे बÞत सारे दल हैं, जिन्होंने उनको समर्थन दिया है।
प्रश्र : एनडीए के घटक दलों के सांसदों और विधायकों के प्रणव मुखर्जी के समर्थन में क्रास वोटिंग होने की चर्चा है। आपका क्या मानना है?
उत्तर : नहीं! बिल्कुल नहीं! इस बारे कहने का कोई सवाल ही नहीं है। पार्टी का निर्णय हुआ है। सब लोग वोट डालेंगे।
प्रश्र : कांग्रेस उपराष्ट्रपति उम्मीदवार पर आम सहमति बनाने के प्रयास में है। आपका क्या कहना है?
उत्तर : जब तक उनका उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तय नहीं होता है। तब तक हम कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
प्रश्र : आपका क्या अनुमान है कि पी. संगमा को कितने वोट पडऩे के आसार हैं?
उत्तर : यह कोई पार्टी व्हिप लाइन से नहीं चलता है। हम तो उम्मीद करेंगे कि अच्छे खासे वोट मिलें। हमारा उम्मीदवार जीते।
प्रश्र : कांग्रेस प्रणव मुखर्जी के पक्ष में सत्तर फीसदी वोट पडऩे के अनुमान का दावा कर रही है?
उत्तर : वह ठीक है। यह लोकतंत्र है। लोकतंत्र में चुनाव होता है। एक जीतता है, दूसरा नहीं जीतता है। उसमें क्या बात है। परिणाम तो 22 तारीख को ही पता चलेगा।
प्रश्र : प्रणव मुखर्जी के वित्त मंत्री पद से त्यागपत्र देने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह मंत्रालय अपने पास ही रखा है। आपका क्या कहना है?
उत्तर : आठ साल प्रधानमंत्री रहकर भी डा. मनमोहन सिंह सब निर्णयों के भागीदार थे, लेकिन अब वह ऐसा दिखाना चाहते हैं। वह आठ दिन के वित्त मंत्री बनकर अब हरकत में आए हैं। अब सारे सुधार लाएंगे। यानि वह अर्थव्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी एवं वित्तीय घाटे का ठीकरा प्रणव मुखर्जी पर फोडऩा चाहते हैं। वह (प्रधानमंत्री) कहना चाहते हैं कि प्रणव अनफिट वित्त मंत्री थे। अगर प्रणव वित्त मंत्री अनफिट हैं तो बतौर राष्ट्रपति कैसे फिट होंगे? यह स्पष्ट हो गया है कि खुद का चेहरा साफ दिखाने के लिए किस हद तक प्रधानमंत्री जा सकते हैं। इसका यह उदाहरण है।
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