शख्सियत
Date :05-May-2012
 
दूसरों पर पत्थर नहीं फैंकते शीशे के महलों में रहने वाले : प्रेम कुमार धूमल
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हिमाचल में विधानसभा चुनाव की वजह से स्थिति गर्मायी हुई है। भाजपा छोड़कर हिमाचल लोकहित पार्टी बनाने वाले नेता राज्य भाजपा मंत्रियों, विधायकों एवं सांसदों के भ्रष्टाचार को उजागर करने की रणनीति में लगे हुए हैं।
उधर राज्य भाजपा उनको पार्टी में वापस लाने के लिए नर्म दिखती प्रतीत हो रही है ताकि चुनावों में कम नुक्सान हो। क्या इन विद्रोहियों की भाजपा में वापसी संभव है? क्या राज्य के असंतुष्ट मंत्री एवं विधायक ठीक चुनाव से पहले भाजपा सरकार पर स्वर तेज करेंगे? और अगर हां तो भाजपा की क्या रणनीति रहेगी? इस संदर्भ में राजधानी में लिए गए हिमाचल के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से विशेष साक्षात्कार के अंश:-
प्रश्न:- बतौर मुख्यमंत्री भाजपा सरकार की पांच साल की क्या उपलब्धियां हैं?
उत्तर:- इन सवा चार सालों में हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि प्रदेश के आम आदमी को हमने यह अहसास करवाया है कि यह उनकी अपनी सरकार है। किसान, बागवान, मजदूर, कर्मचारी, महिला, दलित वर्ग और नौजवानों की सरकार है। हमने प्रत्येक वर्ग के लिए काम किया है।
हमने हिमाचल के लिए अटल बिजली सीएफएल एवं स्वास्थ्य योजना, अटल आवास योजना, गर्भवती महिलाओं के लिए योजना, सेब रिपंलांटेशन योजना, पोली हाउस की दीनदयाल उपाध्याय योजना, पशुपालक को दूध गंगा योजना, दुकानदारों की बीमा योजना, माता शबरी महिला सशक्तिकरण योजना, वगैरह कई योजनाएं प्रदान की हैं जिससे हिमाचल के प्रत्येक वर्ग को फायदा मिला है। लगभग 26,000 नौजवानों को हम रोजगार दे चुके हैं।
पचास हजार लोगों को प्राइवेट सैक्टर में काम मिले हैं। यह मूक क्रांति हिमाचल में आई है। इसलिए जो पांच साल पहले प्रति व्यक्ति आय 43,000 रुपए थी वह अब 73,000 रुपए हो गई है जो राज्य की जीडीपी 33,000 करोड़ रुपए थी, वह अब 63,400 रुपए से ऊपर हो गई है।
प्रश्न:- कैग ने राज्य सरकार पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रदेश सरकार केन्द्रीय फंड का सही इस्तेमाल नहीं कर रही है एवं योजनाओं की खामियों और अनियमितताओं से करोड़ों का नुक्सान हुआ है। आप इस टिप्पणी को 'मिशन रिपीट' से किस तरह से सामंजस्य बैठाएंगे?
उत्तर:- मुझे किसी भी वर्ष की टिप्पणी बता दें, जिसमें टिप्पणी 'एडवर्स' नहीं आई हो। कैग का काम ही कमियां ढूंढने का है। कैग रिपोर्ट आने के बाद पीएसी के पास जाती है। उसमें बहुत सारी टिप्पणियां तो विलोपित कर दी जाती हैं। हमें वल्र्ड बैंक ने सराहा है। एशियन विकास बैंक ने पावर प्रोजैक्टस के लिए हिमाचल को पैसा दिया। बैंक ने पुणे में यह कहते हुए अवार्ड हिमाचल सरकार को दिया कि इस परियोजना में केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में पैसे का सर्वश्रेष्ठ सदुपयोग हुआ है। लगातार तीन साल से 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन के लिए पूरे देश में टाप कर रहे हैं जहां तक कैग की रिपोर्ट का सवाल है, जहां हमने गलती की होगी, उसको हम ठीक करेंगे।
प्रश्न:- 1989 में हिमाचल में क्रान्तिकारी मोर्चा ने राज्य विधानसभा में 17 सीटों पर उम्मीदवार खड़े कर 11 सीटें जीती थीं। इसके बाद सुखराम की पार्टी ने भी सीटें जीतीं। इन सबका फायदा भाजपा को मिला था लेकिन इस बार भाजपा से टूट कर हिमाचल लोकहित पार्टी में गये भाजपा दिग्गजों की वजह से इस तीसरी शक्ति का फायदा कांग्रेस को मिलेगा, जबकि भाजपा को नुक्सान होगा?
उत्तर:- यह बढिय़ा सवाल है। मैं 1989 से पहले 1967 में ले जाना चाहूंगा जब ठाकुर सेन नेगी, हीरा सिंहपाल एवं जयबिहारी लाल खाची ने शायद इस तरह की हिमाचल लोकराज पार्टी का गठन किया था। उसने भी काफी सीटें जीती थीं। अंतत: वे लोग सत्तारुढ़ दल में शामिल हो गए थे। 2007 में विशुद्ध भाजपा की सरकार दो तिहाई बहुमत से बनाई है। हम आने वाले चुनावों में विशुद्ध भाजपा की राज्य सरकार रिपीट कर रहे हैं जहां तक भाजपा छोड़ गए लीडरों का सवाल है सबने देख लिया है कि वे अब कितने रह गए हैं। मैं इस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं कि पंजाब में जो पीपीपी का हाल हुआ है, मुझे लगता है कि हिमाचल में भी इससे अलग नहीं होने वाला है।
प्रश्न:- भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती भाजपा छोड़ गए। महेश्वर एण्ड कम्पनी से लगातार वापस आने की अपील कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि अभी भी भाजपा हाईकमान इनके भाजपा में वापस आने के फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है?
उत्तर:- पार्टी ने अपनी तरफ से तो कोई फैसला नहीं लिया है और राजनीति में कुछ भी असम्भव नहीं होता है लेकिन सतपाल सत्ती ने मुझे बताया है कि उनसे मीडिया ने प्रश्न कुछ और किया था और छपा कुछ और है। वैसे भी पार्टी किसी भी कदम से सुदृढ़ हो, वह कदम पार्टी लेने के लिए कभी भी तैयार रहती है।
प्रश्न:- हिमाचल लोकहित पार्टी 'सीडी/पोस्टर वार' से अब आने वाले दिनों में भाजपा राज्य सरकार के मंत्रियों, सांसदों एवं विधायकों के भ्रष्टाचार को उजागर करने की रणनीति में है। आप इसे कैसे काउंटर करेंगे?
उत्तर:- हमारी सरकार पूरी पारदर्शिता से काम कर रही है इसलिए हमें नहीं लगता है कि वह कोई ऐसी नई बात करेंगे। शीशे के महलों में रहने वाले दूसरों पर पत्थर फैंकेंगे तो दूसरी तरफ वाले भी चुप नहीं बैठेंगे। अभी जिस मंत्री पर उनका निशाना था, उस मंत्री ने उन पर मान हानि का दावा भी कर दिया है।
प्रश्न:- आपके भाजपा के ही विधायक बाल नाहटा ने आरोप लगाया कि धूमल सरकार उनके ही क्षेत्र में अवैध खनन एवं भ्रष्टाचार पर नकेल डालने में असफल रही है। जब पिछली बार भाजपा चुनाव हारी थी तब भी इस तरह की परिस्थितियां बनी थीं, जब आपके मंत्रियों किशन कपूर एवं हवाला ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाए थे? आपका क्या मानना है?
उत्तर:- रोहड़ू की जनता जानती है कि अवैध खनन में कौन लगा था। किसी के कहने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। हमने कहा है कि निष्पक्ष जांच हों।
प्रश्न:- ऐसा माना जा रहा है कि राज्य के मंत्री किशन कपूर एवं हवाला के असंतुष्टता के स्वर ठीक चुनाव से पहले तेज हो सकते हैं। आपका क्या कहना है?
उत्तर:- मेरे सामने तो वे जनसभाओं एवं विधानसभा में गुणगान करते हैं। मैंने तो ऐसे स्वर देखे नहीं। एक कहावत है कि काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती है। अगर कोई लोग पौने पांच साल सत्ता का आनंद लेकर कोई बात करना चाहेंगे तो लोग उनसे भी हिसाब मांगेंगे। जिन लोगों ने ऐसे स्वर उठाए थे तो उनमें कितने बाद में जीते थे?
प्रश्न:- आपने सशक्त लोकायुक्त की बात कही है, लेकिन इसमें पावर सैक्टर, एनजीओ एवं स्पोट्र्स संस्थाओं को दायरे से बाहर रखा गया है जब 1985 में वीरभद्र सिंह सरकार ने लोकायुक्त बनाया था तो भाजपा ने तब इसका विरोध किया था। क्या चुनाव से पहले भाजपा का यह सियासी स्टंट नहीं है?
उत्तर:- देखिए जो लोकसेवक है, वह ही लोकायुक्त के दायरे में आता है। 1985 में मुझे पता नहीं है किसने विरोध किया था? मेरे ध्यान में ऐसी बात नहीं है कि किसी ने विरोध किया हो। समाज में गतिशीलता की वजह से परिवर्तन आते रहते हैं। हमने ऐसा लोकायुक्त बनाया है जिस पर लोगों की विश्वसनीयता है। इसके दायरे में वार्ड पंच से लेकर मुख्यमंत्री तक हैं।
प्रश्न:- आपको क्या लगता है कि राज्य में चुनाव कब होंगे?
उत्तर:- जब भी हो जाएं, हम तो तैयार हैं लेकिन मुझे त्यौहारों एवं फसल वगैरह से प्रैक्टिकल बात नवम्बर की ही लगती है।

 
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