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Date :21-July-2012
 
पवार परिपक्व नेता-मुद्दा सुलझा लेंगे : शकील अहमद
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यूपीए सरकार में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और सरकार में ठन गई है। हालांकि एनसीपी ने कहा है कि कांग्रेस के साथ कुछ मुद्दों पर मतभेद जरूर हैं लेकिन एनसीपी यूपीए की सबसे बड़ी जिम्मेदार सहयोगी पार्टी है और बनी रहेगी। एनसीपी इस मुद्दे पर सोमवार को मीटिंग कर अपना फैसला लेगी। 2014 का लोकसभा चुनाव नजदीक है। शरद पवार अपना दबाव बनाकर 'कुछ' मुद्दे सुलझाने की रणनीति में हैं। आखिर ऐसे दबाव क्यों बनाए जा रहे हैं? क्या इसका असर लोकसभा चुनाव या उपराष्ट्रपति चुनाव पर पड़ सकता है? राहुल गांधी की नई भूमिका से कांग्रेस एवं देश की राजनीति पर क्या असर पडऩे के आसार हैं? अगले पार्लियामेंट सैशन में केन्द्र सरकार अन्ना एवं बाबा रामदेव को कैसे काउंटर करेगी? राजधानी में कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद से लिए गए विशेष साक्षात्कार के अंश इस प्रकार हैं:-
प्रश्न : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ बढ़े हुए मतभेदों पर आपका क्या कहना है?
उत्तर : मेरी जानकारी के अनुसार उन्होंने (शरद पवार) कुछ मसलों पर बातचीत की है। वह प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है। प्रधानमंत्री उसको देख रहे हैं। उम्मीद करते हैं कि मामला बहुत जल्दी ही तय हो जाएगा एवं सुलझा लिया जाएगा। कोई ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी। प्रधानमंत्री एवं यूपीए के लीडरशिप मामले को सुलझा लेंगे। शरद पवार एनसीपी के लीडर हैं, हमारा बहुत ही खास सहयोगी दल हैं। हम दोनों दल दिल्ली एवं महाराष्ट्र में साथ हैं, इसलिए मैं नहीं समझता हूं कि यह मसला कोई बड़ी या बुरी शक्ल अख्तियार करे।
प्रश्न : एनडीए में नम्बर वन की लड़ाई चरमसीमा पर है, अब 2014 लोकसभा चुनाव से पहले यूपीए में नम्बर दो की लड़ाई सामने आ गई है। आपका क्या मानना है?
उत्तर : नहीं! मेरा ख्याल है कि एक साथ काम करने में किन्हीं मसलों पर दो राय हो सकती है लेकिन अगर जिम्मेदार लीडरशिप है तो उसको बैठकर आपस में बातचीत कर सुलझाने की कोशिश की जाती है। जैसा आपने देखा कि ममता बनर्जी के साथ राष्ट्रपति मुद्दे पर मतभेद था लेकिन आखिरकार ममता ने राष्ट्रपति ही नहीं बल्कि उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार को भी समर्थन देने का ऐलान किया है। हम मानते हैं कि शरद पवार बहुत ही परिपक्व लीडर हैं एवं आपस में बातचीत कर मामला सुलझा लिया जाएगा।
प्रश्न : जिस तरह से कयास लगाए जा रहे हैं कि 2014 लोकसभा के चुनाव के लिए एक नए समीकरण का संकेत है। आपको क्या लगता है?
उत्तर : नहीं ! मुझको ऐसा बिल्कुल नहीं लगता है। आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भी लगभग यही समीकरण रहेंगे। लगभग यही पार्टियां एक साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगी। एनडीए के कुछ लोग अलग हो सकते हैं। जैसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सिग्नल दे रहे हैं कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री मुद्दे पर वह (नीतीश) अलग होंगे। यूपीए का समीकरण लगभग यही रहेगा बल्कि एक-दो के एनडीए से यूपीए में आने की मुझे उम्मीद लग रही है। यानि एक-दो घटक दल बढ़ेंगे, मगर आने वाले समय में मुझे कोई 'डै्रमेटिक' बदलाव नजर नहीं आता है।
प्रश्न : शरद पवार मुद्दे का क्या उपराष्ट्रपति चुनाव पर कोई असर पडऩे की संभावना है?
उत्तर : नहीं! बिल्कुल नहीं! केन्द्रीय मंत्री शरद पवार हमारे घटक दल हैं। शरद पवार ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे यूपीए उम्मीदवार पर कोई असर पड़े।
प्रश्न : कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की पार्टी या सरकार में भूमिका बढऩे से कांग्रेस पार्टी या देश की राजनीति में क्या प्रभाव पडऩे की उम्मीद करते हैं?
उत्तर : युवाओं के आने से एक ताजा हवा चलने की बात होती है। राहुल गांधी के बारे में पार्टी के सब लोग चाहते थे कि वह पार्टी या सरकार में बड़ी भूमिका अदा करें। वह केवल कांग्रेस एवं एनएसयूआई तक अपने को सीमित न रखें, जिसके सकारात्मक परिणाम भी मिले। उत्तर प्रदेश के परिणामों का अगर राजनीतिक विश्लेषण किया जाए तो यह बात सच है कि जितनी सीटें हमें बढऩे की उम्मीद थी वही नहीं बढ़ीं, लेकिन वोट के प्रतिशत पर गौर किया जाए, तो छह फीसदी हमारा वोट बढ़ा है। इतना वोट किसी भी सियासी पार्टी का नहीं बढ़ा। इसका सबसे ज्यादा श्रेय राहुल गांधी को हो जाता है। इससे साफ है कि अगर वह (राहुल) राष्ट्रीय स्तर पर आकर बड़ी भूमिका अदा करते हैं तो न केवल कांग्रेस और यूपीए के लिए बल्कि देश के लिए भी एक अच्छी बात होगी। एक नई शुरूआत होगी। लोग युवाओं से उम्मीद करते हैं।
प्रश्न : क्या राहुल गांधी के नई बड़ी भूमिका में आने का असर कांग्रेस पार्टी की आंतरिक राजनीति पर पडऩे के आसार हैं? क्या खेमेबाजी में बदलाव होगा?
उत्तर : मैं ऐसा नहीं समझता हूं। कांग्रेस इस देश में 126 सालों से सेवा कर रही है। हमारी नीतियों एवं कार्यक्रम के अलावा एक खास बात है कि हमारी पार्टी का एक लीडर होता है। सब अपनी बात अपने लीडर के सामने रखते हैं एवं लीडर का फैसला जो होता है उसको सब मानते हैं। कांग्रेस की लीडर सोनिया गांधी के फैसले को भी सब लीडर मानते हैं इसलिए इतने दिनों से हमारी पार्टी सशक्त रूप से आम एवं गरीब आदमी के साथ जुड़ी हुई है। हमारा लीडर घर के अभिभावक की तरह है जो सब के साथ एक तरह का न्याय करता है।
प्रश्न : अगले महीने शुरू होने वाले पार्लियामेंट सैशन में अन्ना हजारे एवं बाबा रामदेव द्वारा सरकार पर कड़े हमले करने की रणनीति है। कांग्रेस कैसे काउंटर करेगी?
उत्तर : जहां तक अन्ना और बाबा रामदेव का सवाल है। लोग वास्तविकता जान गए हैं। यह विपक्ष के लोग प्रायोजित लोग हैं। शुरू में गलती हुई थी, क्योंकि सरकार भी तो इंसान ही चलाते हैं। सरकार कोई देवता तो है नहीं। केन्द्र सरकार ने शुरू में उनकी मंशा ठीक समझी। अन्ना टीम को तब सरकार द्वारा गठित टीम में शामिल किया गया। बाबा रामदेव के स्वागत के लिए चार-चार मंत्री गए जबकि किसी देश का प्रमुख आता है तो एक ही मंत्री स्वागत के लिए जाता है। तब सरकार ने उनकी मंशा ठीक समझी थी। उनको इज्जत दी गई लेकिन जब जाहिर हो गया कि वह भाजपा एवं आरएसएस के इशारे पर काम कर रहे हैं, लोग भी इनके एक्शन से वाकिफ हो गए हैं। पार्लियामेंट चर्चा का सबसे बड़ा स्थान है। अगर पार्लियामेंट में कोई रुकावट डालता है, वह तो पांच सांसद भी रुकावट डाल सकते हैं। यह तो चर्चा से ही पब्लिक को पता चलता है कि सरकार एवं विपक्ष की बात कितनी सही या गलत है। संसद में सरकार हर तरह की बहस के लिए तैयार है।

 
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