24-25 मई को भाजपा की मुम्बई में कार्यसमिति की बैठक हो रही है। भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी का कार्यकाल आरएसएस की सिफारिश पर दोबारा बढ़ाए जाने की प्रबल सम्भावना है, पर भाजपा के कुछ वरिष्ठ लीडरों को यह नहीं सूट कर रहा है। आखिर 2014 के लोकसभा चुनाव पर सबकी नज़र है। मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी, येदियुरप्पा, वसुन्धरा राजे कार्यसमिति की बैठक में भाग ले रहे हैं या नहीं इस पर सवालिया निशान है। कर्नाटक में येदियुरप्पा और राजस्थान में वसुन्धरा राजे के अन्दरखाने हाईकमान के खिलाफ स्वर तेज होते जा रहे हैं। उत्तराखंड और हिमाचल में स्थानीय भाजपा लीडरों का 'विद्रोह' जारी है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री की कार्यशैली से स्थानीय भाजपा लीडर हाईकमान के समक्ष रोष जता चुके हैं। क्या कार्यसमिति की बैठक में हाईकमान इन मुद्दों का कोई हल निकालेगा? क्या भाजपा लोकसभा चुनाव से पहले चैक एण्ड बैलेंस की रणनीति जारी रखेगी।
राजधानी में इस सन्दर्भ में भाजपा प्रवक्ता एवं सांसद शाहनवाज हुसैन से लिए विशेष साक्षात्कार के अंश इस प्रकार हैं :
प्रश्र : मुम्बई में होने वाली भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक पर आपका क्या कहना है?
उत्तर : यह बैठक ऐतिहासिक होगी क्योंकि देश के वर्तमान हालात पर भाजपा के तमाम नेताओं की राय आएगी। देश के हालात बद से बदत्तर होते जा रहे हैं। देश पर आर्थिक संकट है। सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। घोटालों में फंसी सरकार सिर्फ अपने को बचाने में लगी है। देश के विकास पर सारे काम ठप्प पड़े हैं। यह सरकार राजनीतिक फैसले ही नहीं ले रही है। सारी हुकूमत नौकरशाहों पर चल रही है। देश को बचाने की कोई चिन्ता इस सरकार को नहीं है। इसलिए भाजपा राष्ट्रीय कार्यसमिति में इन पहलुओं पर विचार करेगी। इस बैठक में राजनीतिक, आर्थिक एवं किसानों के लिए प्रस्ताव होगा। भाजपा के सारे लीडर आपस में बैठकर, फिर से लालकिले पर भाजपा का झण्डा फहराए, इसकी योजना बनाएंगे।
प्रश्र : भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को आरएसएस की सिफारिश पर दोबारा अध्यक्ष पद पर मोहर लगाने की प्रबल सम्भावना है। आपका इस बारे में क्या मानना है?
उत्तर : अभी इस पर कोई विचार नहीं हुआ है। भाजपा पदाधिकारियों की बैठक में इस तरह की कोई चर्चा नहीं हुई। राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में संगठन पर विस्तार से चर्चा करेंगे। वहां जाने पर ही पता चलेगा कि किस तरह के प्रस्ताव संगठन के बारे में हैं।
प्रश्र : पिछली बार मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नहीं आए थे। क्या मुम्बई में कार्यसमिति की बैठक में उनके आने के कोई संकेत हैं?
उत्तर : इस बारे हमारे विरोधियों को कोई मौका मिलने वाला नहीं है। सब लोग कार्यसमिति की बैठक में आएंगे। ऐसी चर्चाएं पूरी तरह निराधार हैं। भाजपा को मजबूत करने के लिए यह बैठक होगी।
प्रश्र : पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल भी ऐसी बैठकों में हिस्सा नहीं लेते थे। मुख्यमंत्री मोदी के विरोधी केशुभाई पटेल का इस बार बैठक में हिस्सा लेना क्या हाईकमान द्वारा मोदी का काउंटर रणनीति समझी जाए?
उत्तर : कोई ऐसा नहीं है कि कौन आ रहे हैं और नहीं आ रहे हैं। अभी तक इसकी सूचना नहीं है। मेरे पास सिर्फ यही सूचना है कि सब लोग आ रहे हैं और मेरे पास किसी के नहीं आने की सूचना नहीं है।
प्रश्र : पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा एवं वसुन्धरा राजे ङ्क्षसधिया की भी कार्यसमिति में भाग लेने की अनिच्छा जाहिर करने की सूचनाएं हैं। हाईकमान की ऐसे में क्या सोच है?
उत्तर : ये सब पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। सब हाईकमान की बात को मानते हैं। पार्टी में सामूहिक नेतृत्व है और नितिन गडकरी की अध्यक्षता में पार्टी मजबूत हुई है। कहीं कोई दिक्कत नहीं है। मुम्बई में पार्टी और मजबूत होकर उभरेगी।
प्रश्र : उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखण्ड में भाजपा का ग्राफ गिरा है। क्या मुम्बई कार्यसमिति में इस मुद्दे पर भी चर्चा होगी?
उत्तर : देखिए! भाजपा अगर चुनाव जीतती, अब भी हम विचार करते हैं। जहां हार जाते हैं, उस पर भी हम चर्चा करते हैं। कोई ऐसा विषय नहीं रहना है, जिस पर चर्चा नहीं होगी। जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, उन पर भी चर्चा होगी एवं उन पर भी रणनीति बनाई जाएगी और इन चुनावों में जीतने का प्रण लेंगे।
प्रश्र : बीजू जनता दल एवं एआईडीएमके पार्टी ने पूर्व स्पीकर पी.ए. संगमा को अपने समर्थन का ऐलान कर दिया है। एनडीए के साथ जब अभी ऐसे दल नहीं साथ दे रहे हैं, तो 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद केन्द्र में सरकार बनाने के लिए कैसे सामंजस्य बिठाएंगे?
उत्तर : भाजपा का स्पष्ट मत है कि अगली सरकार एनडीए की बनेगी। इसमें कोई शक मुझे नज़र नहीं आता है। देश की जनता को पूरी तरह से विश्वास है कि कांग्रेस की सरकार अब 'वेंटिलेटर' पर है। मेरा मानना है कि कुम्भकरण को जगाया जा सकता है लेकिन कांग्रेस सरकार की कुम्भकर्णी नींद को नहीं जगाया जा सकता है। इस देश की जनता को इस सरकार से मुक्त करवाना भाजपा का फर्ज है क्योंकि यह सरकार कुछ भी करने की स्थिति में नहीं है।
प्रश्र : कांग्रेस सरकार जिस तरह से कथित घोटालों में फंसती जा रही है। क्या भाजपा सरकार सशक्त रूप से विपक्ष की भूमिका निभाने में सफल रही है?
उत्तर : भाजपा संसद से सड़क तक विपक्ष की भूमिका में लड़ रही है। भाजपा एक मजबूत विकल्प देने की स्थिति में है। हालांकि राज्यों में चुनावी लड़ाई में भाजपा हल्की-सी फिसली है लेकिन लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय तौर पर देश की जनता के सामने भाजपा एक सशक्त तौर पर विकल्प देने में सफल होगी। जनता भी भाजपा का साथ देगी।
प्रश्र : भाजपा से अभी मुस्लिम समुदाय दूर है। क्या भाजपा कार्यसमिति में इस बारे में कोई चर्चा होगी?
उत्तर : भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा है कि वह मुस्लिम समुदाय को साथ लेकर चलना चाहते हैं। बड़ी तादाद में दिल्ली कार्पोरेशन चुनाव में भी मुस्लिम समुदाय ने भाजपा के पक्ष में वोट डाला है। हम सबको साथ लेकर चलेंगे।
प्रश्र : भाजपा 2014 लोकसभा चुनाव में केन्द्र में आने की रणनीति में है, दूसरी तरफ भाजपा के कुछ लीडर प्रधानमंत्री पद की लाबिंग की रणनीति में हैं। क्या ऐसे में भाजपा को अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार तय नहीं कर देना चाहिए?
उत्तर : यह अभी तय करने का समय नहीं है। जब चुनाव का ऐलान होगा, उससे पहले भाजपा का संसदीय बोर्ड और एनडीए के नेता मिलकर यह निर्णय करेंगे कि हम किसके नेतृत्व में और कैसे चुनाव लड़ेंगे।
प्रश्र : लेकिन हाईकमान में लीडरों द्वारा जिस तरह से इसके सन्दर्भ में 'चैक एण्ड बैलेंस' की राजनीति की जा रही है। उससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि ऐसा क्यूं किया जा रहा है?
उत्तर : देखिए! इस पर भाजपा में कोई विवाद नहीं है। हमारी पार्टी किसी व्यक्ति विशेष की पार्टी नहीं है। हमारे यहां लोकतंत्र है। अपनी बात रखने का अधिकार एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक को है। यहां जो बात कही जाती है उसके सन्दर्भ में यह कहना कि पार्टी में मतभेद हैं, यह सही नहीं है।
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