Shakeel Azmi Poetry: शकील आज़मी के खजाने से 7 खूबसूरत शेर

Khushi Srivastava

भूक में इश्क़ की तहज़ीब भी मर जाती है 
चाँद आकाश पे थाली की तरह लगता है

ज़मीन ले के वो आए तो घर बनाया जाए 
खड़े हैं देर से हम लोग ईंट गारे लिए

कहीं से चाँद कहीं से क़ुतुब-नुमा निकला 
क़दम जो घर से निकाला तो रास्ता निकला

बात से बात की गहराई चली जाती है 
झूट आ जाए तो सच्चाई चली जाती है

जाने कैसा रिश्ता है रहगुज़र का क़दमों से
थक के बैठ जाऊँ तो रास्ता बुलाता है

बस इक पुकार पे दरवाज़ा खोल देते हैं
ज़रा सा सब्र भी इन आँसुओं से होता नहीं

कुछ दिनों के लिए मंज़र से अगर हट जाओ
ज़िंदगी भर की शनासाई चली जाती