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Rajsthan : महंत बालकनाथ और दीया कुमारी के अलाव CM की दौड़ में कौन – कौन शामिल

राजस्थान में फिर एक रिवाज रिपीट हुआ सरकार नहीं , मोदी मैजिक के चलते प्रदेश में सत्ता रूढ़ पार्टी की एक ना चल सकी और जनता ने राज्य में भाजपा सरकार को अपना समर्थन देकर बड़ी सत्ता के शासन के लिए चुना। ये तो स्पष्ट हो गया की राजस्थान में सरकार बीजेपी की बनेगी लेकिन मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर अब अटकले तेज हो गई है। इन सबके बीच कुछ नाम उभर कर आ रहे है। जिसमे महंत बालकनाथ और दीया कुमारी मुख्य रूप से सामने आ रहे है।

Highlight

  • राजस्थान में कांग्रेस को बढ़त
  • क्यों बालकनाथ पर दाव खेल सकती है बीजेपी
  • ये वजह हो सकती है दिया कुमारी के नाम पर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सक्रिय रहे

राजस्थान की सियासत में बीजेपी के इस नेता को ‘योगी’ कहा जाता है. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के नाथ संप्रदाय के योगी बालकनाथ अपने संप्रदाय के ही बाल सखा की तरह आक्रमक हिंदुत्व की राजनीति करते हैं। तिजारा सीट जहां से बाबा बालकनाथ ने जीत दर्ज की है वहां उनके नामांकन कराने से लेकर चुनाव प्रचार तक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सक्रिय रहे। सबसे अहम बात यह है कि आज तक और एक्सिस माई इंडिया के सर्वे में राजस्थान की जनता अशोक गहलोत के बाद सीएम पद के लिए सबसे अधिक बालकनाथ को ही पसंद कर रही थी। यहां तक कि वसुंधरा राजे और सचिन पायलट से भी अधिक लोगों ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की बात की थी।

क्यों बालकनाथ पर दाव खेल सकती है बीजेपी

ओबीसी और यादव होने का फायदा बीजेपी को मिलेगा बालकनाथ यादव जाति से आते हैं। राजस्थान में ओबीसी होने के चलते उन्हें अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी दीया कुमारी से बढ़त हासिल हो रही है। क्योंकि हालिया ट्रेंड यही है कि हर पार्टी ओबीसी नेताओं को ही प्रोजेक्ट कर रही है। कांग्रेस नेता अपने भाषणों में यह कहा करते थे कि उनके पास तीन मुख्यमंत्री ऐसे हैं जो ओबीसी कैटेगरी से आते है, जबकि बीजेपी का केवल एक सीएम ही ओबीसी कैटेगरी का है। बालकनाथ का यादव होना उत्तर प्रदेश -बिहार के साथ हरियाणा के लोकसभा चुनावों मे पार्टी के लिए कारगर हो सकता है।

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यूपी और बिहार में अगर यादव वोट का बहुत बड़ा शेयर

अखिलेश यादव और लालू परिवार के कारण यादव वोट बीजेपी को नहीं मिलते रहे हैं। लोकसभा चुनावों में बालकनाथ को फेस बनाकर अगर यादव वोटर्स का कुछ परसेंट भी पार्टी खींच लेती है तो यूपी बिहार में समाजवादी पार्टी और आरजेडी को कमजोर किया जा सकेगा। कट्टर हिंदुत्ववादी छवि का लाभ विकास और कल्याणकारी योजनाओं में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। बीजेपी ने भी काफी कुछ उसी तरह की योजनाओं का वादा किया था। कांग्रेस की बजाय अगर बीजेपी को जनता ने पसंद किया तो इसका मतलब है कि हिंदुत्व का मुद्दा जोरदार चला है।

हिंदुत्ववादी छवि का मिलेगा लाभ

पार्टी को एक और योगी जैसा मजबूत नेता मिल जाएगा कट्टर हिंदुत्ववादी योगी आदित्यनाथ की शैली की पूरे देश में चर्चा होती है। योगी आदित्यनाथ का इस्तेमाल पूरे देश में बीजेपी करती रही है। यहां तक की पूर्वोत्तर में भी योगी की डिमांड रहती है. राजस्थान मे भी बालकनाथ को पसंद करने का कारण यही है कि लोगों को लगता है कि बालकनाथ योगी आदित्यनाथ की शैली में राज्य को चलाएंगे। बालकनाथ किसी भी जाति के नेता नहीं।

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दीया कुमारी का भी नाम चर्चाओं में

राजस्थान बीजेपी में पूर्व मुख्यमंत्री वसुधरा राजे सिंधिया के पैरलल महारानी दीया कुमारी को खड़ा करने की कोशिस यूं ही नहीं हो सकती। यह है कि पार्टी वसुंधरा की जगह नया नेतृत्व तैयार करने के मूड में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजस्थान में अपनी सभाओं में जिस तरह दीया कुमारी को तवज्जो दिए उससे उनकी राजस्थान में राजनीतिक ताकत नजर आ रही थी। दिसंबर 2018 में जब बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह ने दीया कुमारी और उनकी मां पद्मिनी देवी के जयपुर आवास पर पहुंचे थे तभी से यह अटकलें लगनी शुरू हो गईं थीं कि महारानी का भविष्य पार्टी में उज्जवल दिख रहा है।

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ये वजह हो सकती है दिया कुमारी के नाम पर

जयपुर राजघराना कछवाहा राजपूतों का रहा है. महारानी दीया कुमारी कई बार ये दावा कर चुकी हैं कि उनका वंश श्रीराम के बेटे कुश के 399वीं पीढ़ी है। पिता भवानी सिंह को 1971 के भारत-पाक युद्ध में पराक्रम दिखाने के लिए याद किया जाता है। महारानी दीया कुमारी का परिवार कांग्रेसी रहा है पर दीया कुमारी हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर जमकर बोलती हैं। उन्होंने एक बार ताजमहल पर अपने खानदान का दावा ठोंक दिया था। उनका कहना था कि उनके पास ऐसे डॉक्युमेंट हैं जिससे साबित होता है कि यह जगह हमारी है।

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पंजाब केसरी एक हिंदी भाषा का समाचार पत्र है जो भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के कई केंद्रों से प्रकाशित होता है।