World Autism Awareness Day 2026 : चंडीगढ़ स्थित पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) के शिशु रोग विभाग ने विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस 2026 के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऑटिज़्म से प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों की चुनौतियों, अनुभवों और सामाजिक संघर्षों को सामने लाना था।
इस वर्ष कार्यक्रम का विषय “क्लिनिक से परे ऑटिज़्म: सामाजिक बाल-चिकित्सा दृष्टिकोण से परिवारों के जीवन-अनुभव” रखा गया था। आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि ऑटिज़्म को केवल चिकित्सा दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक संदर्भ में भी समझना जरूरी है।
कार्यक्रम की शुरुआत और मुख्य संदेश
कार्यक्रम का उद्घाटन PGIMER के डीन डॉ. संजय जैन ने दीप प्रज्वलित कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ऑटिज़्म की समय रहते पहचान और बच्चों को समावेशी शिक्षा देना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि इन बच्चों को सही समय पर सहायता और उचित वातावरण मिले, तो वे भी समाज की मुख्यधारा में अपनी जगह बना सकते हैं। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ऑटिज़्म से प्रभावित बच्चों के परिवारों को मजबूत सहायता प्रणाली उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण है।
परिवारों ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा “वॉयसेज़ ऑफ ऑटिज़्म” नामक सत्र रहा। इस सत्र में ऑटिज़्म से प्रभावित बच्चों की माताओं और देखभाल करने वालों ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए।
इस दौरान उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों की देखभाल में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। खास तौर पर थेरेपी का आर्थिक बोझ, समाज में मौजूद कलंक और उचित स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की कठिनाइयों जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा की गई।
इन अनुभवों के माध्यम से यह संदेश भी सामने आया कि परिवारों को भावनात्मक और सामाजिक समर्थन की कितनी आवश्यकता होती है।
प्रेरणादायक सफलता की कहानी

कार्यक्रम के दौरान PGIMER में जन्मे एक युवा ऑटिस्टिक व्यक्ति ने अपनी प्रेरणादायक कहानी भी साझा की। उन्होंने बताया कि आज वे “Cricket Ki Awaaz” नाम से एक यूट्यूब चैनल चला रहे हैं।
उनकी कहानी ने यह साबित किया कि अगर सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो ऑटिज़्म से प्रभावित लोग भी अपनी प्रतिभा के दम पर समाज में अलग पहचान बना सकते हैं।
समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी
इस कार्यक्रम में कई सामाजिक और शैक्षणिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। रोटरी क्लब चंडीगढ़ की अध्यक्ष अभा शर्मा जोशी, चंडीगढ़ सिटिजन फाउंडेशन के प्रतिनिधि कर्नल (डॉ.) देव, प्रो. अंबुज और काविता दास सहित कई गणमान्य लोग इस अवसर पर मौजूद रहे। इसके अलावा विभिन्न स्कूलों के शिक्षक, बाल तंत्रिका विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक और रोटरैक्ट क्लब (AIMS मोहाली) के सदस्य भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि समाज को ऑटिज़्म को केवल एक बीमारी के रूप में नहीं देखना चाहिए। इसके बजाय इसे मानव विविधता का एक हिस्सा मानते हुए स्वीकार करने की जरूरत है। उनका कहना था कि यदि समाज में जागरूकता बढ़े और समावेशी सोच विकसित हो, तो ऑटिज़्म से प्रभावित लोगों को बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
‘न्यूरो-इन्क्लूसिव’ समाज बनाने का संकल्प
कार्यक्रम का समापन केक काटकर किया गया। इसके साथ ही उपस्थित सभी लोगों ने एक ऐसे ‘न्यूरो-इन्क्लूसिव’ समाज के निर्माण का संकल्प लिया, जहां हर व्यक्ति की क्षमता और अस्तित्व को समान महत्व दिया जाए।
आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि ऑटिज़्म से प्रभावित लोगों को समझने, स्वीकार करने और उनके साथ सहयोग करने से ही एक अधिक संवेदनशील और समावेशी समाज का निर्माण संभव है।
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