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क्या है ‘आमीन’ शब्द? जिसे प्रार्थना के अंत में बोलते है तीन बड़े धर्मों के लोग

हिन्दूं धर्म में लोग अपने इष्ट देवता का नाम बार बार पुकारते हैं तो कई बार कुछ सामान्य शब्द या जयकारा एक नारे का रूप ले लेते है। हालांकि अन्य धर्म के लोग इन जयकारों या शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की प्रार्थना के अंत में कहे जाने वाला शब्द ‘आमीन’ एक ऐसा शब्द है, जिसका इस्तेमाल एक धर्म नहीं बल्कि तीन धर्म में होता हैं। इन धर्मों में मुस्लिम, ईसाई और यहूदी तीनों सम्प्रदाय के लोग आते हैं।

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हालांकि, स्थानीय बोली के कारण ‘आमीन’ शब्द का उच्चारण आमेन, अमिन या आमीन होता है। लेकिन इसका मतलब एक ही है यानी की “ऐसा ही हो”।

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आपको पहले बता दें, ‘आमीन’ हिब्रू भाषा का शब्द है जो करीब 2500 साल से भी अधिक पुराना है। हिब्रू भाषा में यह विश्वास शब्द के बहुत करीब अर्थ रखता है। इसे आमतौर पर धार्मिक या ईश्वर पर गहरा विश्वास करने वाले लोग बोलते हैं। यह शब्द लंबे समय से यहूदीयों से जुड़ा रहा और यह लंबे समय तक शपथ लेने से जुड़ा रहा। लेकिन बाद में इसका व्यापक अर्थ बना और यह ईसाई और इस्लाम धर्म में भी चला गया।

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बता दें, मुस्लिमों के लिए यह आमीन शब्द हो गया और इसे प्रार्थना के अंत समय पर बोला जाने लगा। इसे केवल अकेला ही बोला जाता है और कई लोग इसे बहुत ही अच्छी धार्मिक बात कहने के बाद भी कहते पाए जाते हैं।

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वहीं, ईसाई धर्म की बात करें तो, आमीन या आमेन भी प्रार्थनाओं और दुआओं के अंत में बोला जाता रहा है। ईसाई लोग इसे सामूहिक और निजी दोनों प्रार्थनाओं में इस्तेमाल करते हैं। बाइबल में कई जगह इस शब्द का जिक्र है जो कि किसी खास तरह की प्रार्थना के तौर पर नहीं कि कुछ खास स्थितियों के किस्सों से जुड़े हैं।

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वहीं, जब आप सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट देखते है और उसमें कुछ ऐसा लिखा हो, जिसे लोग चाहते है वहां भी आपने इस शब्द का इस्तेमाल देखा होंगा। जैसे कि एक पोस्ट पर कोई व्यक्ति ‘अच्छे भविष्य के लिए’ सहमति जाहिर करते हुए भी इस शब्द का प्रयोग करता है। जबकि प्रार्थनाओं के अंत में तो इसे कहा ही जाता है।

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