Akbar Allahabadi Poetry: अकबर इलाहाबादी के खजाने से 8 खूबसूरत शेर

Khushi Srivastava

लोग कहते हैं कि बदनामी से बचना चाहिए 
कह दो बे उसके जवानी का मज़ा मिलता नहीं

उन्हीं की बे-वफ़ाई का ये है आठों-पहर सदमा 
वही होते जो क़ाबू में तो फिर काहे को ग़म होता

आंखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते 
अरमान मिरे दिल के निकलने नहीं देते

इस गुलिस्तां में बहुत कलियां मुझे तड़पा गईं
क्यूं लगी थीं शाख़ में क्यूं बे-खिले मुरझा गईं

इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद
अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता

हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम 
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता

दुनिया में हूं दुनिया का तलबगार नहीं हूं 
बाज़ार से गुज़रा हूं ख़रीदार नहीं हूं

इश्क़ के इज़हार में हर-चंद रुस्वाई तो है 
पर करूं क्या अब तबीअत आप पर आई तो है