Khushi Srivastava
आबादी भी देखी है वीराने भी देखे हैं
जो उजड़े और फिर न बसे दिल वो निराली बस्ती है
आबादी भी देखी है वीराने भी देखे हैं
जो उजड़े और फिर न बसे दिल वो निराली बस्ती है
फ़ानी की जिंदगी भी क्या जिंदगी थी रब
मौत और जिंदगी में कुछ फर्क चाहिए
दुनिया मेरी बला जाने महंगी है या सस्ती है
मौत मिले तो मुफ़्त न लूं हस्ती की क्या हस्ती है
जीने भी नहीं देते, मरने भी नहीं देते
क्या तुमने मोहब्बत की हर रस्म उठा डाली
ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर
आस कहती है ठहर ख़त का जवाब आने को है
हर राह से गुजरकर दिल की तरफ चला हूं
क्या हो जो उनके घर की यह राह भी न निकले
बिजलियां टूट पड़ीं जब वो मुक़ाबिल से उठा
मिल के पल्टी थीं निगाहें कि धुआं दिल से उठा