By Bhawana Rawat
Oct 18, 2025
'कभी हयात का ग़म है कभी तिरा ग़म है...'
अहमद राही के खूबसूरत शेर
shayari
Source: Social Media
हर एक बात के यूं तो दिए जवाब उस ने
जो ख़ास बात थी हर बार हंस के टाल गया
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कहीं ये अपनी मोहब्बत की इंतिहा तो नहीं
बहुत दिनों से तिरी याद भी नहीं
आई
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मिरे हबीब मिरी मुस्कुराहटों पे न जा
ख़ुदा-गवाह मुझे आज भी तिरा ग़म है
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ज़िंदगी के वो किसी मोड़ पे गाहे गाहे
मिल तो जाते हैं मुलाक़ात कहां होती है
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कोई वादा भी तो वफ़ा न हुआ
बे-वफ़ाओं से प्यार कौन करे
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कभी हयात का ग़म है कभी तिरा ग़म है
हर एक रंग में नाकामियों का मातम है
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दिन को रहते झील पर दरिया किनारे रात को
याद रखना चांद तारो इस हमारी बात
को
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'तू किसी रेल सी गुज़रती है... दुष्यंत कुमार के खूबसूरत शेर
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