By Bhawana Rawat
Oct 16, 2025
'तुम न होते न सही ज़िक्र तुम्हारा होता...'
अख़्तर शीरानी के मशहूर शेर
shayari
Source: Social Media
कांटों से दिल लगाओ जो ता-उम्र साथ दें
फूलों का क्या जो सांस की गर्मी न सह सकें
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ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना
ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते
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उन रस भरी आंखों में हया खेल रही है
दो ज़हर के प्यालों में क़ज़ा खेल रही है
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इन्ही ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चांद निकलेगा
अंधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी
है
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कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता
तुम न होते न सही ज़िक्र तुम्हारा होता
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ऐ दिल वो आशिक़ी के फ़साने किधर गए
वो उम्र क्या हुई वो ज़माने किधर गए
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काम आ सकीं न अपनी वफ़ाएं तो क्या करें
उस बेवफ़ा को भूल न जाएं तो क्या करें
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'शुक्र करो कि हम दर्द सहते हैं, लिखते नहीं...' Piyush Mishra के बेहतरीन शेर
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