Khushi Srivastava
अपनी आलोचना का हमेशा स्वागत करना चाहिए वरना पता कैसे चलेगा की हमारी बात लोगो तक पहुची है की नहीं
कोई भी लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं, हारा वही जो लड़ा नहीं
हारने का भी अपना मजा है, हारने पर ही अपनी वास्तविकता का ज्ञान होता है
सुगंध के बिना पुष्प, तृप्ति के बिना प्राप्ति, ध्येय के बिना कर्म और प्रसन्नता के बिना जीवन व्यर्थ है
अगर मोहब्बत नहीं होगी तो नफरत का आना स्वाभाविक है
असफलता एक चुनौती है इसे स्वीकार करो, क्या कमी रह गई देखो और सुधार करो
जब बातें औरों से होती हैं, तो तथ्य निकलते हैं। जब बात स्वयं से होती है, तो गूढ़ रहस्य निकलते हैं