By Bhawana Rawat
Oct 25, 2025
'मोहब्बत रही चार दिन ज़िंदगी में...'
अनवर शऊर के चुनिंदा शेर
shayari
Source: Social Media
चमन में आप की तरह गुलाब एक भी नहीं
हुज़ूर एक भी नहीं जनाब एक भी नहीं
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अच्छा ख़ासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूं
अब मैं अक्सर मैं नहीं रहता तुम हो जाता हूं
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हमेशा हाथों में होते हैं फूल उनके लिए
किसी को भेज के मंगवाने थोड़ी होते हैं
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फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था
वो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था
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मोहब्बत रही चार दिन ज़िंदगी में
रहा चार दिन का असर ज़िंदगी भर
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बुरा बुरे के अलावा भला भी होता है
हर आदमी में कोई दूसरा भी होता है
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इत्तिफ़ाक़ अपनी जगह ख़ुश-क़िस्मती अपनी जगह
ख़ुद बनाता है जहां में आदमी अपनी जगह
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'रहनुमाओं की अदाओं पे फ़िदा है दुनिया... दुष्यंत कुमार के खूबसूरत शेर
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