Asar Lucknowi Poetry: ‘कोई रूठा है और तुम को मनाना है…’ असर लखनवी के बेमिसाल शेर

By Khushi Srivastava

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Oct 16, 2025

हम कैद से रिहा जो हुए भी तो क्या हुए जब गोश-ए-चमन में नसीब आशियां न हो  

चुपके से नाम ले के तुम्हारा कभी कभी दिल डूबने लगा तो उभारा कभी कभी 

तेरी अदाएं दिल को लुभाएं तो क्या करें आंखें न मानें, देखे ही जायें तो क्या करें ?  

इक बात भला पूछें किस तरह मनाओगे जैसे कोई रूठा है और तुम को मनाना है

तानों का उसके जब न कोई बन पड़े जवाब मिर्जा 'असर' जो सर न झुकायें तो क्या करें ?  

किसी ने हाल जब पूछा तो यह हालत हुई अपनी नज़र भी झुक गई अपनी जबां भी रुक गई अपनी