By Bhawana Rawat
Oct 22, 2025
'कैसे मुमकिन है कि हम दोनों बिछड़ जाएंगे...'
अज़ीज़ वारसी के चुनिंदा शेर
shayari
Source: Social Media
दिल में अब कुछ भी नहीं उन की मोहब्बत के सिवा
सब फ़साने हैं हक़ीक़त में हक़ीक़त के सिवा
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तुम्हारी ज़ात से मंसूब है दीवानगी
मेरी
तुम्हीं से अब मिरी दीवानगी देखी नहीं जाती
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कैसे मुमकिन है कि हम दोनों बिछड़ जाएंगे
इतनी गहराई से हर बात को सोचा न करो
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इक वक़्त था कि दिल को सुकूं की तलाश थी
और अब ये आरज़ू है कि दर्द-ए-निहां
रहे
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ग़म-ए-उक़्बा ग़म-ए-दौराँ ग़म-ए-हस्ती की क़सम
और भी ग़म हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
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'तिरा वजूद गवाही है मेरे होने की... फरहत शहज़ाद के बेहतरीन शेर
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