By Bhawana Rawat
Oct 14, 2025
'स्टेज पर पड़ा था जो पर्दा वो उठ चुका...'
दिलावर फ़िगार के बेहतरीन शेर
shayari
Source: Social Media
वहां जो लोग अनाड़ी हैं
वक़्त काटते हैं
यहां भी कुछ मुतशायर दिमाग़ चाटते हैं
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जूते के इंतिख़ाब को मस्जिद में जब गए
वो जूतियां पड़ीं कि ख़ुदा याद आ गया
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सियाह ज़ुल्फ़ को जो बन-संवर के देखते हैं
सफ़ेद बाल कहां अपने सर के देखते हैं
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दावतों में शाइरी अब हो गई है रस्म-ए-आम
यूं भी शाइर से लिया जाता है अक्सर इंतिक़ाम
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ऐसा भी एक वक़्त नज़र से गुज़र गया
जब 'साबरी' के सब्र का पैमाना भर गया
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कोई क़दम उठाना तो है राह-ए-शौक़ में
अगला क़दम न उठ्ठे तो पिछ्ला उठाइए
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स्टेज पर पड़ा था जो पर्दा वो उठ चुका
जो अक़्ल पर पड़ा है वो पर्दा उठाइए
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Hafeez Jalandhari Poetry: "हम न तुम्हें भुला सके..." हफ़ीज़ जालंधरी के सुंदर शेर
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