By Bhawana Rawat
Oct 10, 2025
'सियाह ज़ुल्फ़ को जो बन-संवर के देखते हैं...'
दिलावर फ़िगार के बेहतरीन शेर
shayari
Source: Social Media
औरत को चाहिए कि अदालत का रुख़ करे
जब आदमी को सिर्फ़ ख़ुदा का ख़याल हो
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वहां जो लोग अनाड़ी हैं वक़्त काटते
हैं
यहां भी कुछ मुतशायर दिमाग़ चाटते
हैं
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जूते के इंतिख़ाब को मस्जिद में जब
गए
वो जूतियां पड़ीं कि ख़ुदा याद आ
गया
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सियाह ज़ुल्फ़ को जो बन-संवर के देखते हैं
सफ़ेद बाल कहां अपने सर के देखते
हैं
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स्टेज पर पड़ा था जो पर्दा वो उठ चुका
जो अक़्ल पर पड़ा है वो पर्दा उठाइए
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दावतों में शाइरी अब हो गई है रस्म-ए-आम
यूं भी शाइर से लिया जाता है अक्सर इंतिक़ाम
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पोशीदा बम भी होते हैं कचरे के ढेर में
हुश्यार हो के रोड से कचरा उठाइए
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'नज़दीक की ऐनक से उसे कैसे मैं ढूंढू... अनवर मसूद के खूबसूरत शेर
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