By Bhawana Rawat
Oct 21, 2025
'तिरा वजूद गवाही है मेरे होने की...'
फ़रहत शहज़ाद के बेहतरीन शेर
shayari
Source: Social Media
इतनी पी जाए कि मिट जाए मैं और तू की तमीज़
यानी ये होश की दीवार गिरा दी जाए
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ज़िंदगी कट गई मनाते हुए
अब इरादा है रूठ जाने का
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हम से तंहाई के मारे नहीं देखे जाते
बिन तिरे चांद सितारे नहीं देखे जाते
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अज़ीज़ मुझ को हैं तूफ़ान साहिलों से सिवा
इसी लिए है ख़फ़ा मेरा नाख़ुदा मुझ से
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तिरा वजूद गवाही है मेरे होने की
मैं अपनी ज़ात से इंकार किस तरह करता
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एक बस तू ही नहीं मुझ से ख़फ़ा हो बैठा
मैंने जो संग तराशा था ख़ुदा हो बैठा
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मेरी बातें हैं सब बातें तुम्हारी
मेरा अपना कोई क़िस्सा नहीं है
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'कभी हयात का ग़म है कभी तिरा ग़म है...' अहमद राही के खूबसूरत शेर
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