By Bhawana Rawat

Oct 27, 2025

'हम रातों को उठ उठ के जिन के लिए रोते हैं...' हसरत जयपुरी के चुनिंदा शेर 

shayari

Source: Social Media

जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूं नहीं देते ख़त किस लिए रक्खे हैं जला क्यूं नहीं देते

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ख़ुदा जाने किस किस की ये जान लेगी वो क़ातिल अदा वो क़ज़ा महकी महकी

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किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा नाम मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूं तो मिटा क्यूं नहीं देते

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हम रातों को उठ उठ के जिन के लिए रोते हैं वो ग़ैर की बांहों में आराम से सोते हैं

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वो आंखों में काजल वो बालों में गजरा हथेली पे उस के हिना महकी महकी  

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दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे हर रस्म-ए-मोहब्बत को मिटाने के लिए आ 

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होता चला आया है बे-दर्द ज़माने में सच्चाई की राहों में कांटे सभी बोते हैं