Hindi Poetry: मशहूर शेर जो सबके दिलों में बसते हैं

Prachi Kumawat

ऐ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है 
वही होता है जो मंज़ूर-ए-ख़ुदा होता है 
- मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

चल साथ कि हसरत दिल-ए-मरहूम से निकले 
आशिक़ का जनाज़ा है ज़रा धूम से निकले
 
- फ़िदवी लाहौरी

बे-ख़ुदी बे-सबब नहीं 'ग़ालिब' 
कुछ तो है जिस की पर्दा-दारी है 
- मिर्ज़ा ग़ालिब

हज़रत-ए-दाग़ जहाँ बैठ गए बैठ गए 
और होंगे तिरी महफ़िल से उभरने वाले
 
- दाग़ देहलवी

ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम 'अमीर' 
सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है
 
- अमीर मीनाई

मकतब-ए-इश्क़ का दस्तूर निराला देखा 
उस को छुट्टी न मिली जिस को सबक़ याद हुआ 
- मीर ताहिर अली रिज़वी

ख़बर सुन कर मिरे मरने की वो बोले रक़ीबों से 
ख़ुदा बख़्शे बहुत सी ख़ूबियाँ थीं मरने वाले में
 
- दाग़ देहलवी

सुर्ख़-रू होता है इंसाँ ठोकरें खाने के बा'द 
रंग लाती है हिना पत्थर पे पिस जाने के बा'द 
- सय्यद मोहम्मद मस्त कलकत्तवी