Khushi Srivastava
इस तअल्लुक़ में नहीं मुमकिन तलाक़
ये मोहब्बत है कोई शादी नहीं
कठिन है तय करना उम्र का सफ़र तन्हा
लौट कर न देखूँगा चल पड़ा अगर तन्हा
ज़िंदगी की ज़रूरतों का यहाँ
हसरतों में शुमार होता है
फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था
वो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था
लगी रहती है अश्कों की झड़ी गर्मी हो सर्दी हो
नहीं रुकती कभी बरसात जब से तुम नहीं आए
हमेशा हाथों में होते हैं फूल उन के लिए
किसी को भेज के मंगवाने थोड़ी होते हैं
सभी ज़िंदगी के मज़े लूटते हैं
न आया हमें ये हुनर ज़िंदगी भर
हैं पत्थरों की ज़द पे तुम्हारी गली में हम
क्या आए थे यहाँ इसी बरसात के लिए
वो मुझ से रूठ न जाती तो और क्या करती
मिरी ख़ताएँ मिरी लग़्ज़िशें ही ऐसी थीं