Samiksha Somvanshi
पीएम 2.5 वायु प्रदूषण में मौजूद बहुत ही छोटे-छोटे कण होते हैं और इनका साइज 2.5 माइक्रोमीटर से भी कम होता है।
वाहनों से निकलने वाले धुएं, कोयला जलाने से ये कण वातावरण में जाते हैं और जब कोई व्यक्ति सांस लेता है तो ये छोटे कण सांस के जरिए लंग्स में जाते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, किसी भी इलाके में पीएम 2.5 का लेवल 100 से कम होना चाहिए। लेकिन दिल्ली और आसपास के इलाकों में ये 300 से अधिक है।
एम्स में प्लमोनोलॉजी और स्लीप मेडिसिन विभाग के पूर्व एचओडी डॉ. एचसी खिलनानी बताते हैं कि पीएम 2.5 का 100 से ज्यादा होना कई खतरनाक बीमारियों का कारण बन सकता है।
जिन इलाकों में पीएम 2.5 का लेवल लगातार ज्यादा बना रहता है वहां लोगों में सांस संबंधी बीमारियों के विकसित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
मास्क पहनें, घर में एयर प्यूरीफायर का यूज करें, स्वस्थ आहार लें। घर के बाहर एक्सरसाइज न करें।
प्रदुषण से बचाव की ज़्यादा जानकारी के लिए आप अपने नज़दीकी डॉक्टर से सलाह ले सकते है।