Khushi Srivastava
जवानी में कई ग़ज़लें अधूरी छूट जाती हैं
कई ख़्वाहिश तो दिल ही दिल में पूरी छूट जाती हैं
जुदाई में तो मैं उससे बराबर बात करता हूं
मुलाक़ातों में सब बातें अधूरी छूट जाती हैं
जो मैं या तुम समझ लें वो इशारा कर लिया मैंने
भरोसा बस तुम्हारा था तुम्हारा कर लिया मैंने
लहर है हौसला है रब है हिम्मत है दुआएं हैं
किनारा कर ने वालों से किनारा कर लिया मैंने
मैं अपने गीत ग़ज़लों से उसे पैग़ाम करता हूं
उसी की दी हुई दौलत उसी के नाम करता हूं
हवा का काम है चलना दीये का काम है जलना
वो अपना काम करती है मैं अपना काम करती हूं
किसी के दिल की मायूसी जहां से होके गुज़री है
हमारी सारी चालाकी वहीं पर खोके गुज़री है
तुम्हारी और मेरी रात में बस फ़र्क़ इतना है
तुम्हारी सोके गुज़री है हमारी रोके गुज़री है
पुकारे आंख में चढ़कर तो ख़ूं तो ख़ूं समझता है
अंधेरा किसको कहते हैं ये बस जुगनू समझता है
हमें को चांद तारों में भी तेरा रूप दिखता है
मोहब्बत को नुमाइश को अदाएं तू समझता है
मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबिरा दिवाना था कभी मीरा दिवानी है
यहां सब लोग कहते हैं मेरी आंखों में आंसू हैं
जो तू समझे तो मोती है जो ना समझे तो पानी है
समंदर पीर का अंदर है लेकिन रो नहीं सकता
ये आंसू प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को अपना तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा नहीं हो सकता
तेरी झीलों की मोहब्बत में है पागल बादल
मां के माथे पे दमकते हुए पावन आंचल
तेरी सरगोशी पे कुर्बान मेरा पूरा वतन
मेरे कश्मीर मेरी जान मेरे प्यारे चमन
तेरी झीलों की मोहब्बत में है पागल बादल
मां के माथे पे दमकते हुए पावन आंचल
तेरी सरगोशी पे कुर्बान मेरा पूरा वतन
मेरे कश्मीर मेरी जान मेरे प्यारे चमन