Poetry: “मेरे हिस्से में मां आई...” पढ़े मां पर लिखे गए खूबसूरत शेर

Khushi Srivastava

एक मुद्दत से मेरी मां नहीं सोई 'ताबिश'
मैंने इक बार कहा था मुझे डर लगता है 
-अब्बास ताबिश

मुझे मालूम है मां की दुआएं साथ चलती हैं, 
सफ़र की मुश्किलों को हाथ मलते मैंने देखा है
-आलोक श्रीवास्तव 

वो लम्हा जब मेरे बच्चे ने मां पुकारा मुझे
मैं एक शाख़ से कितना घना दरख़्त हुई
-हुमैरा रहमान

चलती फिरती हुई आंखों से अज़ान देखी है
मैंने जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है
-मुनव्वर राना

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई
मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में मां आई
-मुनव्वर राना

मैं रोया परदेस में भीगा मां का प्यार
दुख ने दुख से बातें की बिन चिट्ठी बिन तार
-निदा फ़ाज़ली

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
मां बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है
-मुनव्वर राना

मुर्ग़े की आवाज़ से खुलती 
घर की कुंडी जैसी मां 
बेसन की सोंधी रोटी पर 
खट्टी चटनी जैसी माँ 
-निदा फाजली