Poetry: पढ़ें ‘मोहब्बत’ पर लिखें गए ये चुनिंदा शेर

Khushi Srivastava

आँखें जो उठाए तो मोहब्बत का गुमाँ हो 
नज़रों को झुकाए तो शिकायत सी लगे है
-जाँ निसार अख़्तर

 वक़्त के बदलने से दिल कहाँ बदलते हैं
आप से मोहब्बत थी आप से मोहब्बत है
-नाज़िम नक़वी

माना कि मोहब्बत का छुपाना है मोहब्बत
चुपके से किसी रोज़ जताने के लिए आ
-तालिब बाग़पती

आप पहलू में जो बैठें तो सँभल कर बैठें 
दिल-ए-बेताब को आदत है मचल जाने की 
-जलील मानिकपूरी

ऐ दोस्त हम ने तर्क-ए-मोहब्बत के बावजूद 
महसूस की है तेरी ज़रूरत कभी कभी 
-नासिर काज़मी

अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए 
अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए 
-उबैदुल्लाह अलीम

अंजाम-ए-वफ़ा ये है जिस ने भी मोहब्बत की 
मरने की दुआ माँगी जीने की सज़ा पाई 
-नुशूर वाहिदी

अपने हमराह जो आते हो इधर से पहले 
दश्त पड़ता है मियाँ इश्क़ में घर से पहले 
-इब्न-ए-इंशा

और कुछ ज़ख़्म मिरे दिल के हवाले मिरी जाँ
ये मोहब्बत है मोहब्बत में शिकायत कैसी
-अज़ीज़ नबील