Prayagraj: बजरंगबली को क्यों कहते हैं “प्रयाग का कोतवाल”, कहानी है रहस्यमयी

Khushi Srivastava

प्रयागराज में कई ऐसी जगह हैं जिनका इतिहास से काफी गहरा संबध है

प्रयागराज में संगम किनारे हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है

माना जाता है कि इस मंदिर की कहानी हनुमान जी के पुनर्जन्म से जुड़ी हुई है

पौराणिक कथाओं के अनुसार, लंका जीतने के बाद बजरंगबली पीड़ा के कारण मरणासन्न अवस्था में यहां पहुंच आए थे

तब सीता जी ने यहीं पर उन्हें अपना सिंदूर देकर नया जीवन दिया और उन्हें स्वस्थ और चिरंजीवी रहने का आशीर्वाद दिया

माता सीता ने यह भी कहा कि जो भी त्रिवेणी संगम में स्नान करेगा उसे उसका फल तभी मिलेगा जब वह बजरंगबली जी के दर्शन करेगा

हनुमान जी को "प्रयाग के कोतवाल" भी कहा जाता है

इतिहास की माने तो 1400 ईसवी में मुगल सम्राट औरंगजेब के शासन के दौरान इस प्रतिमा को हटाने के लिए 100 सैनिकों को लगाया गया था। लेकिन वे प्रतिमा को हिला भी नहीं सके

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