Prachi Kumawat
सारे जहाँ से अच्छा
मेरे तो गिरिधर गोपाल
बात चलत नई चुनरी रंग डारी
ऐसी लागी लगन
संवारो
पग घुंघरू बांध
जमुना किनारे
राणा जी