Siraj Aurangabadi Poetry: सिराज औरंगाबादी के खजाने से 8 खूबसूरत शेर

Khushi Srivastava

अगर कुछ होश हम रखते तो मस्ताने हुए होते 
पहुंचते जा लब-ए-साक़ी कूं पैमाने हुए होते 

अबस इन शहरियों में वक़्त अपना हम किए ज़ाए 
किसी मजनूं की सोहबत बैठ दीवाने हुए होते 

न रखता मैं यहां गर उल्फ़त-ए-लैला निगाहों कूं
तो मजनूं की तरह आलम में अफ़्साने हुए होते

अगर हम आश्ना होते तिरी बेगाना-ख़ूई सीं 
बरा-ए-मस्लहत ज़ाहिर में बेगाने हुए होते

ज़ि-बस काफ़िर-अदायों ने चलाए संग-ए-बे-रहमी 
अगर सब जम्अ करता मैं तो बुत-ख़ाने हुए होते

न करता ज़ब्त अगर मैं गिर्या-ए-बे-इख़्तियारी कूं 
गुज़रता जिस तरफ़ ये पूर वीराने हुए होते

नज़र चश्म-ए-ख़रीदारी सीं करता दिलबर-ए-नादां 
अगर क़तरे मिरे आंसू के दुरदाने हुए होते

मोहब्बत के नशे में ख़ास इंसान वास्ते वर्ना 
फ़रिश्ते ये शराबें पी कि मस्ताने हुए होते