LIfestyle
By Pratibha
Jan ,19, 2024
जान लेनी थी साफ़ कह देते क्या ज़रूरत थी मुस्कुराने की अज्ञात
बेचैन इस क़दर था कि सोया न रात भर पलकों से लिख रहा था तिरा नाम चाँद पर अज्ञात
गुज़र तो जाएगी तेरे बगैर भी लेकिन बहुत उदास बहुत बे-क़रार गुज़रेगी अज्ञात
दिल में तूफ़ान हो गया बरपा तुम ने जब मुस्कुरा के देख लिया अज्ञात