बिहार में बच्चों में वायरल फीवर के मामलों में तेजी, कई अस्पतालों में भरे ज्यादातर बेड्स

बिहार में वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है क्योंकि बड़ी संख्या में बच्चे अस्पतालों में भर्ती हैं और ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं।

बिहार में वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है क्योंकि बड़ी संख्या में बच्चे अस्पतालों में भर्ती हैं और ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। पटना के चार बड़े अस्पताल- नालंदा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस और पटना एम्स में बच्चों के लिए मौजूद लगभग सभी बेड्स के भरने की सूचना है।
पटना एम्स के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ लोकेश तिवारी ने कहा कि बच्चे एक अज्ञात वायरस से संक्रमित हैं जो फेफड़ों में संक्रमण का कारण बनता है और बच्चे भी ब्रोंकाइटिस से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए हमने अधिकांश बच्चों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के सभी बड़े अस्पतालों के एनआईसीयू और पीआईसीयू वार्ड में इन दिनों 80 फीसदी कब्जा है और 50 फीसदी बच्चों को फेफड़ों में संक्रमण और ब्रोंकाइटिस की समस्या हो रही है।
मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) में स्थिति चिंताजनक है। इस अस्पताल में पीआईसीयू वार्ड में 102 बेड हैं और इसमें 107 मरीज भर्ती हैं। इनमें से 80 ऑक्सीजन सपोर्ट पर आईसीयू में हैं। पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में कुल 131 मरीज भर्ती हैं और उनमें से 68 निमोनिया और ब्रोंकाइटिस से पीड़ित हैं।
नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एनएमसीएच) पटना के एनआईसीयू और पीआईसीयू वार्ड में 87 नाबालिग मरीज हैं, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में 71 और पटना एम्स में 45 मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं।बिहार के सारण, गोपालगंज, सीवान पश्चिम चंपारण में भी 400 से ज्यादा बच्चे इसी बीमारी से ग्रसित हैं। अमनौर प्रखंड में तीन और गोपालगंज में पिछले सप्ताह एक बच्चे की मौत हुई है।

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