रिलायंस-बीपी पेट्रोल पंपों की स्थापना से सरकारी तेल कंपनियों की बढ़ेंगी मुश्किलें

इसलिए देश में सरकारी कंपनियों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। साथ ही ईंधन की कीमत सरकार के हस्तक्षेप से बाहर हो जाएगी।

नई दिल्ली : वैश्विक वित्तीय सेवा फर्म मॉर्गन स्टेनली ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज और ब्रिटेन की कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम (बीपी) की जियो-बीपी ब्रांड नाम से पेट्रोल पंप स्थापित करने की योजना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जियो-बीपी ब्रांड से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी पर प्रभाव पड़ेगा। 
इसलिए देश में सरकारी कंपनियों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। साथ ही ईंधन की कीमत सरकार के हस्तक्षेप से बाहर हो जाएगी। इससे पहले बीते सप्ताह रिलायंस और बीपी ने अपनी खुदरा ईंधन भागीदारी के ब्योरे की घोषणा की थी। इस योजना में ब्रिटेन की कंपनी की एक अरब डॉलर में 49 फीसदी हिस्सेदारी होगी। मौजूदा समय में रिलायंस इंडस्ट्रीज के 1,400 पेट्रोल पंप हैं। 
इस योजना के तहत रिलायंस की पेट्रोल पंपों की संख्या पांच साल में बढ़कर 5,500 हो जाएगी। इतना ही नहीं, रिलांयस की विमान ईंधन स्टेशनों की संख्या को 30 से बढ़ाकर 45 किया जाएगा। अगर रिलायंस-बीपी गठजोड़ लक्ष्य के अनुरूप पेट्रोल पंप खोल लेता है, तो 2025 तक उसकी पेट्रोल पंप स्टेशनों में बाजार हिस्सेदारी करीब आठ फीसदी हो जाएगी।

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