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कंपनियों को चेयरमैन, एमडी पद अलग करने के लिए दो साल की मोहलत

शेयर बाजार के रेग्युलेटर सेबी ने 500 लिस्टेड कंपनियों के लिए चेयरमैन और एमडी के पद अलग-अलग करने की समयसीमा 2 साल बढ़ा दी है।

मुंबई : शेयर बाजार के रेग्युलेटर सेबी ने 500 लिस्टेड कंपनियों के लिए चेयरमैन और एमडी के पद अलग-अलग करने की समयसीमा 2 साल बढ़ा दी है। अब अप्रैल 2022 तक इस नियम का पालन करना होगा। पहले अप्रैल 2020 की डेडलाइन थी। सेबी ने समयसीमा बढ़ाने की वजह नहीं बताई। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती को देखते खर्च कम रखने के मकसद से कंपनियां ज्यादा समय मांग रही थीं। 
चेयरमैन-एमडी का पद अलग-अलग करने का नियम कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर सेबी की ओर से नियुक्त कोटक कमेटी की सिफारिशों का हिस्सा हैं। चेयरमैन और एमडी या सीईओ की एक पोस्ट होने से बोर्ड ऑफ डायरेक्टर और मैनेजमेंट के हितों में टकराव की आशंका रहती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत कई कंपनियों में चेयरमैन और एमडी की जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति संभाल रहा है। 
रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) को लेकर तो नए एमडी की चर्चाएं शुरू भी हो गई थीं। फिलहाल मुकेश अंबानी आरआईएल के चेयरमैन और एमडी हैं। न्यूज एजेंसी ने रिपोर्ट दी थी कि इस साल एक अप्रैल से सेबी के नियम लागू हुए तो  मुताबिक मुकेश अंबानी नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और अंबानी परिवार से बाहर का कोई व्यक्ति एमडी बन सकता है। ऐसा हुआ तो रिलायंस के इतिहास में यह पहली बार होगा। 
रिपोर्ट में बताया गया कि एमडी पद के लिए निखिल मेसवानी और मनोज मोदी के नाम की ज्यादा चर्चा है। मेसवानी आरआईएल में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। वे मुकेश अंबानी के करीबी और भरोसेमंद माने जाते हैं। मनोज मोदी रिलायंस के बोर्ड में तो शामिल नहीं, लेकिन वे भी मुकेश अंबानी के करीबी समझे जाते हैं। इनके अलावा निखिल मेसवानी के छोटे भाई हितल और पीएमएस प्रसाद के नाम भी चर्चा में होने की रिपोर्ट थी।

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