भाजपा ने कफन पर लगाया टैक्स : दीपेंद्र

NULL

किसान और स्वतंत्रता सेनानी परिवार से संबंध रखने वाले सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके परिवार में हरियाणा में एक अलग ही पहचान है। उनके दादा रणवीर सिंह हुड्डा स्वतंत्रता सेनानी थे। भारत की संविधान सभा के सदस्य, महान स्वतंत्रता सेनानी व व गांधीवादी नेता थे। वह लोकसभा, राज्यसभा, संयुक्त पंजाब विधानसभा सदस्य, पंजाब विधान परिषद सदस्य और संयुक्त पंजाब के सिंचाई मंत्री भी रहे। सिंचाई मंत्री के कार्यकाल के दौरान उन्होंने भाखड़ा बांध बनवाने में अहम भूमिका निभाई। दीपेंद्र के पिता पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। वह हरियाणा की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री रहे। उनके कार्यकाल में हरियाणा ने विकास की नई ऊंचाइयों को छूआ। बीटेक और एमबीए करने के बाद राजनीति में उतरे भी अपने दादा और पिता के नक्शेकदम पर चलने वाले नेता हैं। वह अच्छे वक्ता हैं और लोगों के बहुत चहते हैं। लोकप्रियता इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह तीसरी बार रोहतक से सांसद है। भाजपा द्वारा जीएसटी लागू करने के मौजूदा प्रावधान, देश में विभिन्न राज्यों में हो रहे किसान आंदोलन, भाजपा की नीतियों समेत तमाम मुद्दों पर कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा की पंजाब केसरी के सतेन्द्र त्रिपाठी और आदित्य भारद्वाज के साथ खरी-खरी…

GST 1इस प्रारूप में जीएसटी लागू करना गला घोटना…
> जीएसटी को जिस तरह लागू किया जा रहा है उस पर आपका क्या कहना है ?
मेरा मानना है कि जिस तरह भाजपा सरकार जीएसटी को लागू करने जा रही है वह छोटे व्यापारियों और किसानों का गला घोटने जैसा है। इस देश में कभी कपड़े पर किसी ने टैक्स नहीं लगाया, लेकिन भाजपा ने कपड़े पर भी टैक्स लगा दिया। मरने के बाद इंसान को एक कफन की जरूरत होती है वह भी कपड़े का ही होता है। यह कहां से तर्कसंगत है। जीएसटी का मौजूदा प्रारूप ऐसा है, जिससे इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलेगा। भाजपा सरकार ने कपड़े पर, ऑटोमोबाइल पर, फर्टिलाइजर पर हर चीज पर टैक्स लगा दिया है। बड़े उद्योगपतियों का तो ठीक है लेकिन छोटे दुकानदारों का क्या? उन्हें अब साल में 37 रिटर्न भरने पड़ेंगे। सीए और आईटी प्रोफेशनल की सेवाएं लेनी पड़ेंगी। अधिकारियों को इतनी ताकत दे दी गई है कि वह सिर्फ जुर्माना ही नहीं लगा सकते बल्कि जेल में भी भेज सकते हैं। यह लोकतंत्र नहीं हैं। भाजपा सरकार जिस तरह से जबरन नीतियां लागू कर रही है उसका कोई अर्थ नहीं है।

1 crore note
नोटबंदी से अर्थव्यवस्था ध्वस्त…
> नोटबंदी को लेकर जैसा कहा जा रहा था कि उससे कालाधन वापस आएगा। देश की अर्थव्यवस्था सुधरेगी। आपका क्या मानना है?
देखिए यह सभी जानते हैं कि नोटबंदी से क्या हुआ। नोटबंदी से अर्थव्यवस्था पर चोट पड़ी। पूरी अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई। नोटबंदी से आर्थिक मंदी जैसे हालात पैदा हो गए हैं। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की दर घटकर 6.1 प्रतिशत तक पहुंच गई। नोटबंदी के जितने फायदे बताए थे उनमें से एक फायदा भी नहीं हुआ बल्कि नुकसान बहुत ज्यादा हुआ। जितना कालाधन बाहर बताया जा रहा था उससे ज्यादा बैंकों में पैसा जमा हुआ। इसके बाद भी जीडीपी घटी। जबकि कांग्रेस के कार्यकाल में जीडीपी बढ़ी कभी घटी नहीं। नोटबंदी एक ऐसा फैसला था जिसने सबसे ज्यादा अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। इसके बाद भी सरकार की नीतियां ऐसी हैं जो गरीब और मध्यम वर्ग के लिए मुसीबत पैदा कर रही हैं।

kishan8

देश के अन्नदाता बेहाल…
>  किसानों को लेकर मोदी सरकार की नीतियों से आप कहां तक सहमत हैं?
मैं स्पष्ट तौर पर बोलना चाहूंगा कि इस सरकार ने किसानों की अनदेखी की है। किसानों जख्मों पर मरहम लगाने की बजाए नमक मलने का काम किया है। कांग्रेस ने किसानों का कर्जा माफ किया था लेकिन तब देश की अर्थव्यवस्था अच्छी थी। चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस ने कभी ऐसा नहीं किया इसके विपरीत भाजपा ने यूपी में चुनाव जीतने के लिए किसानों का कर्जा माफ करने की घोषणा की। यूपीए के कार्यकाल में धान और गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में हर वर्ष 15 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई। दालों में 20 प्रतिशत न्यूनतम समर्थन मूल्य की वृद्धि हुई लेकिन भाजपा के कार्यकाल में धान और गेहूं के समर्थन मूल्य में केवल 4 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई। यूपीए के कार्यकाल में 2004 में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 540 रुपए प्रति क्विंटल था। 2014 में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1500 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था। फलों और सब्जियों का और बुरा हाल है। पॉपुलर की कीमत घटकर 1200 रुपए प्रति क्विंटल से 300 रुपए रह गई लेकिन प्लाइवुड सस्ता नहीं हुआ। कपास सस्ता हो गया लेकिन कपड़ा सस्ता नहीं हुआ। इन सबका खामियाजा तो किसान ही भुगत रहा है। हरियाणा में जब हमारी सरकार थी तो हमने गन्ने का मूल्य 310 रुपए प्रति क्विंटल दिया। उस समय चीनी 30 रुपए किलो थी। आज चीनी 45 रुपए किलो मिल रही है लेकिन गन्ने का मूल्य सिर्फ 320 रुपए क्विंटल दिया जा रहा है। तीन वर्षों में सरकार ने किया क्या है? चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने बड़े-जोर शोर से कहा था कि भाजपा किसानों की सरकार है। यदि भाजपा सत्ता में आती है स्वामीनाथन आयोग की सिफरिशें लागू करेगी लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी ऐसा नहीं किया गया। नतीजतन आज किसान सड़कों पर है।

congress 3

>  जीएसटी के मौजूद प्रावधान को लेकर कांग्रेस क्या करेगी ?
देखिए जब हम जीएसटी लागू करने की बात की तो तो हमारा प्रारूप बिल्कुल अलग था। हमारा उद्देश्य एक दम स्पष्ट  था। हम जीएसटी की दरों को अधिकतम 17 प्रतिशत तक रखने के पक्ष में थे लेकिन भाजपा ने अधिकतम 28 प्रतिशत तक स्लैब रखा है। इस संबंध में 13वें फाइनेंस कमीशन ने भी सुझाव दिया था कि जीएसटी की दरों को 12 प्रतिशत तक रखा जाए। यदि कांग्रेस ने इस लागू किया होता ता हम स्लैब कम रखते। वर्तमान जीएसटी में 5 स्लैब हैं इसके अलावा सात रेट हैं। जीएसटी का मौजूदा स्वरूप किसी सूरत में आम आदमी के लिए हितकर नहीं हैं। हम इसके खिलाफ आंदोलन करेंगे हमारी मांग है जीएसटी की दरों को अधिकतम 17 प्रतिशत तक रखा जाए। साथ छोटे उद्यमियों और दुकानदारों को इससे छूट दी जाए। भाजपा जिस तरह से जीएसटी को लागू करने जा रही है उसका स्वरूप कतई ठीक नहीं हैं।

manohar lal

खट्टर राज में पीछे हरियाणा…
>  यदि हरियाणा में कांग्रेस के 10 साल बनाम भाजपा के तीन साल देखें तो आपका क्या मत है ?
भूपेंद्र सिंह हुड्डा जी के समय में हरियाणा में विकास हुआ था। हरियाणा प्रति व्यक्ति आय में नंबर एक पर था। कृषि के मामले में नंबर एक पर था। खेलों में नंबर एक पर था। आज आप हरियाणा को देख रहे हैं यहां कैसी स्थिति है। हरियाणा में जाट आंदोलन हुआ तो हम पर यानी विपक्ष पर अनर्गल आरोप लगाए गए। कांग्रेस के कार्यकाल में जो विकास हरियाणा में हुआ उसका पीछे छोडऩे के लिए भाजपा यदि और बेहतर काम करती और अच्छा विकास करती तो अलग बात थी लेकिन जब ऐसा नहीं हो पाया तो बचने के लिए नकारात्मक राजनीति शुरू कर दी। दिल्ली सरकार ने तो विज्ञापन पर 90 करोड़ रुपए खर्च किए लेकिन हरियाणा तो विज्ञापन पर 190 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। हमारे समय में काम बोलता था अब विज्ञापन बोलता है।

BJP

चरम पर है भ्रष्टाचार…
>  हरियाणा में भाजपा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की कार्यशैली को लेकर आपका क्या कहना है ?
इस बारे में मैं क्या कहूं। उनके खुद के विधायक ही उनकी कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं। उनकी पार्टी में की मतभेद चल रहा है। विकास नहीं, रोजगार नहीं, भ्रष्टाचार चरम पर है। महिलाओं और दलितों के साथ होने वाले अपराधों वृद्धि हुई है। केवल हरियाणा की नहीं यूपी में भी दलितों के साथ कई घटनाएं हो चुकी हैं। हाल ही में हुई सहारनपुर वाली घटना आपके सामने है।

Dipendra1

प्रेरणास्रोत-
 स्वाधीनता सेनानी ,स्व. रणबीर सिंह हुड्डा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

one + 9 =

पंजाब केसरी एक हिंदी भाषा का समाचार पत्र है जो भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के कई केंद्रों से प्रकाशित होता है।