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भारत-जापान के सांझा हित

फिल्म उद्योग के बिग शो मैन माने गए अभिनेेता राजकपूर पर फिल्माया गया यह गीत इतना लोकप्रिय हुआ कि उसने भारतीयों में जापान घूमने की जिज्ञासा पैदा कर दी।

1955 में एक फिल्म आई थी श्री 420 जिसका एक गाना बहुत लोकप्रिय हुआ था। उस गाने के बोल थे-
‘‘मेरा जूता है जापानी, यह पतलून इंग्लिशस्तानी
सर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी।’’
फिल्म उद्योग के बिग शो मैन माने गए अभिनेेता राजकपूर पर फिल्माया गया यह गीत इतना लोकप्रिय हुआ कि उसने भारतीयों में जापान घूमने की जिज्ञासा पैदा कर दी। यह गीत दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बन गया। कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान और भारत के सैनिक एक-दूसरे के खिलाफ लड़े थे। आज दोनों देश दोस्त बन चुके हैं। कौन नहीं जानता कि 1998 में भारत के परमाणु परीक्षण पर जापान बहुत नाराज हुआ था और उसने भारत के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे, लेकिन बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत और जापान दोनों देश करीब आते गए। दोनों देशों की दोस्ती से अब नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। भारत, आस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका क्वाड के सदस्य हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री भारत का दौरा कर चुके हैं। आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस हाल ही में भारत के दौरे पर थे। अब जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा 20-21 मार्च को भारत के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी महत्वपूर्ण बातचीत होगी। दोनों प्रधानमंत्रियों की बातचीत काफी अहम मानी जा रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच फुमियो किशिदा के भारत दौरे पर सभी की नजरें हैं। भारत इस समय जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है और टोक्यो इस साल जी-7 की अध्यक्षता करेगा। टोक्यो और नई दिल्ली अपनी-अपनी प्राथमिकताओं को लेकर करीबी सहयोग करेंगे। भारत और जापान के बीच एक बड़ी समानता है कि दोनों देशों की सीमाएं चीन से लगती हैं। चीन की विस्तारवादी नीतियों से जापान और भारत दोनों पीड़ित हैं। दोनों देशों की बातचीत के दौरान चीन को घेरने के लिए भी रणनीतिक बात होने की सम्भावना है।
क्वाड के लक्ष्य की बात करें तो इसका मुख्य उद्देश्य इंडो पैसिफिक क्षेत्र में एक-दूसरे के हितों की रक्षा करना है। इंडो पैसिफिक क्षेत्र में जिस तरह से चीन लगातार अपनी ताकत बढ़ा रहा है, उसे देखते हुए ही इस फोरम का गठन किया गया है। दक्षिण चीन सागर पर जिस तरह से चीन दावा करता है और इसे अपना क्षेत्र बताता है, उसको लेकर काफी लम्बे समय से विवाद चल रहा है। लेकिन इस क्षेत्र में दूसरे देश फिलिपींस, मलेशिया जैसे देशों का कहना है ​िक हमारी भी सीमा साउथ चायना सी से मिलती है, लिहाजा हमारा भी इस पर अधिकार है। इसी को लेकर लम्बे समय से विवाद चल रहा है। चीन की बढ़ती सैन्य और आर्थिक ताकत का सामना करना भी इस फोरम के अहम लक्ष्यों में से एक है। चीन इस बात को लेकर भी चिंतित है कि भारत इस फोरम में अन्य देशों को शामिल करके इसकी ताकत बढ़ा सकता है और यह चीन के लिए चुनौती साबित हो सकता है।
भारत क्वाड देशों की मदद से चीन की बढ़ती चुनौती का जवाब दे सकता है और साथ ही भारत इन देशों की नौसेना की मदद के जरिये भारत प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त हासिल कर सकता है। एक मुद्दा है जिस पर भारत-जापान में वै​चारिक अंतर है। वह यह है कि रूस-यूक्रेन जंग के बीच जापान जी-7 सदस्यों के साथ मिलकर रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों को बढ़ा रहा है। जबकि भारत रूस के खिलाफ लगातार लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंधों के खिलाफ है। रूस हमारा अभिन्न ​मित्र है। भारत और रूस के मैत्रीपूर्ण संबंधों से पूरी दुनिया परिचित है। जापान को लम्बे समय से ग्लोबल नार्थ के एक निष्क्रिय सदस्य के रूप में देखा जाता रहा है। लेकिन जापान ने जी-7 फोरम को एशियाई रंग देकर अपना योगदान दिया है। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने पहली बार अगस्त 2007 में भारतीय संसद को सम्बोधित ​करते हुए भारत प्रशांत के विचार को व्यक्त किया था। उन्होंने एशियाई लोकतंत्रों के गठबंधन का आह्वान किया था, जिससे अंततः क्वाड को अंतिम रूप मिला। जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने अब ग्लोबल साउथ के विचार को समर्थन दिया है और जी-7 एजैंडे को शीर्ष पर उठाने की पहल की है। उत्तर कोरिया और लम्बे समय से चीन से बढ़ती चुनौतियों के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध ने जापान की रक्षा नीतियों में व्यापक बदलाव की ओर धकेल दिया है। जापान को अब अगले पांच वर्षों में अपने रक्षा बजट को दोगुणा करना पड़ रहा है। 
भारत ने एशिया में जापान के नेतृत्व की भूमिका का समर्थन किया है। जहां तक भारत जापान सहयोग का सवाल है भारत में मैट्रो रेल के निर्माण में सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। जापान की कई कम्पनियां सोनी, टोयोटा और होंडा की उत्पादन इकाइयां भारत के आर्थिक विकास में योगदान दे रही हैं। भारत के बुनियादी ढांचे के विकास की कई परियोजनाओं में जापान ने निवेश किया हुआ है। दोनों देशों का व्यापार भी बढ़ रहा है, लेकिन चीन दोनों देशों के लिए सामरिक और व्यापारिक दृष्टि से ​चुनौती बना हुआ है। इस दृष्टि से दोनों देशों के हित सांझा हैं।

आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com

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