अमेरिका के डूबते बैंक

अमेरिका में पिछले दो दिनों में दो बैंकों के डूब जाने से दुनियाभर में हड़कम्प मचा हुआ है।

अमेरिका में पिछले दो दिनों में दो बैंकों के डूब जाने से दुनियाभर में हड़कम्प मचा हुआ है। अमेरिका को दुनिया की सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्था माना जाता है। सिलीकॉन वैली बैंक के बाद एक और बैंक सिग्नेचर बैंक भी दिवालिया हो गया है। यद्यपि अमेरिकी सरकार ने लोगों को आश्वासन दिया है कि डिपोजिटर का पैसा सुरक्षित है और वह अपना पैसा निकाल पाएंगे लेकिन इन बैंकों के दिवालिया हो जाने से अमेरिका और दुनियाभर में आर्थिक मंदी आने की चेतावनी मिल गई है। इन नामी-गिरामी बैंकों को बंद होने से 15 साल पहले आई आर्थिक मंदी की भी याद दिला दी है,  जिसने अमेरिका समेत बहुत सारे देशों की अर्थव्यवस्था को लड़खड़ा कर रख दिया था। वर्ष 2008 में अमेरिका की प्रतिष्ठित फाइनैंस कम्पनी लिहमन ब्रदर्स ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया था, जिसका झटका अमेरिकी शेयर बाजार ने झेला था। इसके बाद एक के बाद एक अमेरिकी बैंक धराशायी होते गए। तब सितम्बर महीने के आखिरी एक ही दिन में​ निवेशकों के करीब 1 लाख 20 हजार करोड़ डॉलर स्वाहा हो गए थे। वह नुक्सान कितना गम्भीर था इसे समझने के लिए इतना ही काफी है कि तब वह रकम भारत की कुल जीडीपी के बराबर थी। उस दौरान अमेरिका में तेजी से बढ़ते प्रॉपर्टी बाजार को देखते हुए लिहमन ने कर्ज देने वाली 5 कम्पनियों का अधिग्रहण कर लिया था लेकिन बढ़ी हुई ब्याज दरों के कारण बाजार में रियल एस्टेट की मांग घट गई। नतीजा यह हुआ कि जिन्होंने उन कम्पनियों से लोन लिया था वे उसे चुका ही नहीं पाए। नतीजा ये हुआ कि लिहमन के शेयर 48 फीसदी तक टूट गए और उसके बाद 15 सितम्बर, 2008 को लिहमन ने खुद को दिवालिया घोषित करने की गुहार लगाई। 
सिलीकॉन वैली बैंक और सिग्नेचर बैंक के साथ ऐसा क्या हुआ जिससे इन्हें तालाबंदी की कगार पर पहुंचा दिया। सिलीकॉन वैली बैंक का कारोबार अमेरिका में स्टार्टअप के लिए है। यह बैंक स्टार्टअप्स से डिपोजिट भी लेता है और उनको ऋण भी देता है। पिछले पांच साल से यह बैंक सर्वश्रेष्ठ बैंक का अवार्ड जीत रहा था लेकिन उसके ध्वस्त होने में एक साल का समय लगा। दरअसल बैंक ने डिपोजिटर्स का पैसा अमेरिका के बांड में निवेश किया लेकिन जब फैडरल बैंक ने ब्याज दरें बढ़ा दीं तो बांड में गिरावट देखने को मिली। जब अमेरिका में मंदी की आशंका गहराई तो स्टार्टअप्स ने अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया। स्टार्टअप को पैसा देने के लिए बैंक ने 21 बिलियन डॉलर के बांड्स बेच दिए। बांड्स को बेचने में बैंक को 1.75 बिलियन डॉलर यानि 15 हजार करोड़ का नुक्सान हो गया। इसके बाद बैंक ने पूंजी बढ़ाने के लिए 20 हजार करोड़ का इश्यू जारी किया तो लोगों में घबराहट फैल गई। लोगों को लगा कि बैंक के पास पैसा नहीं है। इस समय अमेरिका के बैंकिंग सिस्टम में हलचल मची हुई है। सिलीकॉन वैली बैंक डूबने से भारतीय प्रभावित हुए। जो स्टार्टअप प्रभावित होंगे उनमें कई भारतीय भी हैं। सिलीकॉन वैली बैंक ने भारत में करीब 21 स्टार्टअप में निवेश कर रखा है। सिलीकॉन वैली बैंक भारतीय स्टार्टअप का समर्थक रहा है आैर उसने बैंकिंग सेवाएं प्रदान की हैं। 
अमेरिका में व्यवसाय करने वाले अधिकांश भारतीय स्टार्टअप्स इस बैंक का उपयोग करते हैं और उनका पैसा भी बैंक में जमा है। स्टार्टअप्स प्रभावित हुए तो एक लाख नौकरियां जाने का खतरा पैदा हो जाएगा। करीब दस हजार स्टार्टअप्स को कोई वित्तीय मदद नहीं मिलेगी। बैंक में 37 हजार से अधिक छोटे व्यापारियों के खाते हैं। बैंक के दिवालिया होने से भारत सरकार की भी चिंता बढ़ गई है। सरकार स्टार्टअप के संस्थापकों से बातचीत करेगी ताकि यह देखा जा सके कि सरकार उनकी क्या मदद कर सकती है। अमेरिकी बैंकों के डूबने से भारतीय निवेशक भी घबराए हुए हैं और इसका असर भारतीय शेयर बाजार में भी देखने को मिल रहा है। अमेरिका के केन्द्रीय बैंक फैडरल रिजर्व ने जब ब्याज दरों में बढ़ौतरी की थी तो कई अर्थशा​स्त्रियों ने इसके परिणाम अच्छे नहीं निकलने की चेतावनी दी थी लेकिन फैडरल रिजर्व बैंक की प्राथमिकता मुद्रा स्फीति नियंत्रण में है ​जिसके तहत वह ब्याज दर में वृद्धि की नीति पर आगे बढ़ रहा है। अमेरिका के लोग होम लोन और क्रेडिट कार्ड ऋण से दबाव में हैं। जिसका असर यह हुआ कि बैंक की व्यवस्था बुलबुले की तरह फूट गई।  अब देखना यह है कि अमेरिका सरकार बैंकिंग व्यवस्था को बचाने के लिए क्या हल ​निकालती है। इसी बीच सिलीकॉन वैली बैंक के लिए  एक राहत की खबर यह भी है कि एचएसबीसी इस बैंक को खरीदने के लिए तैयार हो गया है। उसने बैंक का ब्रिटेन का कारोबार अधिग्रहण करने का ऐलान भी कर दिया है। अब देखना यह है कि अमेरिकी बैंकिंग व्यवस्था में लोगों का भरोसा कायम करने के लिए बाइडेन सरकार क्या कदम उठाती है। अमेरिका सरकार वैकल्पिक फंड योजना की तैयारी कर रही है। बैंक की स्थिति क्या होगी यह फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना तय है कि आर्थिक मंदी ने दस्तक दे दी है।
आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com

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