वाह भाई वाह… Mrs. Nanda

आज जैसे सारा भय का वातावरण विश्व भर में छाया है। सभी अपनी क्षमता के अनुसार काम कर रहे हैं। वरिष्ठ नागरिक के सदस्य भी अपनी क्षमता के अनुसार एक-दूसरे का हौसला बढ़ा रहे हैं।

आज जैसे सारा भय का वातावरण विश्व भर में छाया है। सभी अपनी क्षमता के अनुसार काम कर रहे हैं। वरिष्ठ नागरिक के सदस्य भी अपनी क्षमता के अनुसार एक-दूसरे का हौसला बढ़ा रहे हैं। मैं उनके आगे हमेशा हाथ जोड़ती हूं, हमेशा घर में रहो, सेफ रहो, स्वस्थ रहो। 
जैसे कि मैंने पिछले बुधवार को भी एक बेटे की बात बताई थी कि वो अपने पिता (डी.एन. कथूरिया फरीदाबाद के ब्रांच हैड) को कैसे रोकते हैं परन्तु उनके जीवन में उनके डी.एन.ए. में सेवाभाव छुपे हैं, जो रोके नहीं रुकते। ऐसे ही हमारे बहुत से सदस्य हैं जिनकी अच्छी बातें मैं आपसे समय-समय पर शेयर करूंगी। 
ऐसे ही हमारी राजमाता थीं जो अगर आज होतीं तो उन्होंने भी रुकना नहीं था। उनकी बातें, उनका प्यार मेरे दिल में हमेशा रहता है। वो हम सबकी रोल मॉडल थीं, जो अपने अन्दर बहुत से दुख समेटे दुनिया के दु:ख-दर्द बांटती थीं। 
ऐसे ही हमारे विजय खुराना भाई जो हमारी पंजाबी बाग की को-हैड रुबी खुराना के पति थे, जिनको कोविड ने हमसे छीन लिया। वो भी हर पल सेवा के लिए तैयार रहते थे। ऐसे ही महाशय जी जो पहले दिन से साथ जुड़े थे और कभी इंकार नहीं किया। ऐसे ही विक्रमजीत साहनी जो हमेशा सेवा करते हैं और अब कोरोना के समय लोगों की दिल खोलकर सहायता और सेवा कर रहे हैं।
ऐसे ही हमारी माडल टाऊन शाखा की श्रीमती नंदा जी हैं, जिनके डीएनए में सेवा भरी हुई है, वो खाली नहीं बैठ सकतीं, उनमें और उनकी बेटियां रचना (सिंगापुर) और अर्चना में बहुत ही सेवा भाव है। अच्छे समय पर भी वो रुकती नहीं थीं। कभी जरूरतमंद बुजुर्गों के लिए रजाइयां, कभी खाना, कभी थैले बनाकर लाना, कभी कोई उनके जरूरत का सामान देना शामिल है, यही नहीं जब हम 150 बुजुर्गों को सिंगापुर लेकर गए थे इनकी बेटी रचना और दामाद ने वहां सबकी बहुत ही मदद की। यही नहीं इनकी दोती बेटी की बेटी राधिका भी माडल टाऊन ब्रांच में आकर सेवा देती हैं। कभी कोरियोग्राफी भी करती हैं, कहने का भाव है उनके जीन्स और डीएनए में सेवा है।
आज भी वो रुक नहीं रहीं। कभी पोटलियां बनाकर भेजती हैं, कभी कोविड पीडि़तों के घर खाना भेज रही हैं, कभी फ्रंट वारियर के लिए डबलरोटी, आचार भेजती हैं, समय-समय पर अपनी सेवा की खुशी मेरे से बांटती रहती हैं, क्योंकि मैं बहुत व्यस्त रहती हूं, उनका फोन नहीं उठा पाती तो मुझे वीडियो मैसेज और फोटो भेजती हैं। मुझे भी अपनी तीसरी बेटी की तरह मानती हैं। मेरे दु:ख-सुख बांटती हैं। उनकी दोनों बेटियां बहुत खुश होती हैं और उन्हें उत्साहित भी करती रहती हैं। मुझे भी ऐसे एहसास कराती हैं कि मैं उनके परिवार का हिस्सा हूं। कहीं वो कम पड़ती है तो उनकी बेटियां उनको कहती हैं चलो आपका दिल कर रहा है तो करो, यह मेरी तरफ से वाह क्या बात है। जब जड़ (श्रीमती नंदा) में इतना सेवा-भाव है तो उनकी टहनियों, पत्तों में तो होना स्वाभाविक है।
यह तो एक उदाहरण है। बहुत से हमारे सदस्य हैं जो वह और उनके परिवार घर में बैठकर काम कर रहे हैं। ईस्ट दिल्ली के ब्रांच हैड कमल खन्ना और अशोक खन्ना जी लोगों को आक्सीजन सिलैंडर भरवा कर सेवा कर रहे हैं। वाह भाई वाह घर पर रहकर Safe रहिये ॥ Healthy रहिए।

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