जकार्ता में बोले मोदी – भारत और इंडोनेशिया का रिश्ता 1700 साल पुराना

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 देशों की यात्रा के पहले पड़ाव पर मंगलवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचे। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक और सामरिक रिश्तों को मजबूती प्रदान करना है। इंडोनेशिया के अलावा अगले 5 दिनों में पीएम मोदी मलेशिया और सिंगापुर की यात्रा भी करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की आजादी के संघर्ष के शहीदों को आज श्रद्धांजलि देकर अपनी यात्रा की शुरुआत की। उसके बाद मर्डेक पैलेस में राष्ट्रपति जोको विदोदो से मुलाकात की।

आपको बता दे कि राजधानी जकार्ता में पीएम मोदी ने कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। पीएम मोदी का इंडोनेशिया के राष्ट्रपति भवन में शाही स्वागत किया गया। इसके बाद दोनों देशों के बीच डेलीगेशन स्तर की बैठक भी हुई। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग समेत कुल 15 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।

इनमें छह समझौतें विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों के मध्य हुए हैं। इंडोनेशिया के बाली और भारत के उत्तराखंड राज्यों को‘सहोदर राज्य’बनाने की भी घोषणा की गयी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो के बीच आज यहां हुई द्विपक्षीय शिखर बैठक में इन करारों पर हस्ताक्षर किये गये। दोनों देशों ने इस मौके पर संयुक्त वक्तव्य और भारत इंडोनेशिया समुद्री सहयोग पर एक अलग साझा दृष्टिपत्र भी जारी किया।

नरेंद्र मोदी ने यहां इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में इंडोनेशिया में हाल ही में हुए आतंकवादी हमलों की भर्त्सना की और कहा कि इस दुख एवं चुनौतियों के अवसर पर भारत इंडोनेशिया के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ी है।

– पीएम मोदी ने कहा, ‘हाल में हुए आतंकी हमलों में इंडोनेशिया के निर्दोष लोगों के मारे जाने का मुझे गहरा दु:ख है। भारत इस प्रकार के हमलों की कड़ निंदा करता है। इस मुश्किल समय में भारत इंडोनेशिया के साथ मत्रबूती से खड़ी है। इस प्रकार की त्रासद घटनाएं यह संदेश देती है कि आतंकवाद से लड़ने के लिए विश्व स्तर पर मिल-जुल कर किए जा रहे प्रयासों में और अधिक गति लाने की आवश्यकता है।’

– प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच संबंधों की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा, ‘इंडोनेशिया का पंचशील का दर्शन, यहां के लोगों के विवेक और दूरदर्शिता का जीवंत प्रमाण है जिसमें धार्मिक विश्वासों के साथ सांस्कृतिक परंपराओं का भी निर्बाध एकीकरण किया गया है।’

-उन्होंने कहा, ‘सामुद्रिक पड़सियों एवं सामरिक साझेदारों के रूप में हमारी चिन्ताएं एक जैसी हैं। सामुद्रिक मार्गों की सुरक्षा एवं संरक्षा सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य है। यह हमारे आर्थिक हितों की रक्षा के लिए भी आवश्यक है।’

– उन्होंने भारत एवं इंडोनेशिया के बीच समुद्री सहयोग के साझा दृष्टिपत्र की उपयोगिता के बारे में कहा कि आज के बदलते हुए हिन्द प्रशांत क्षेत्र में हमारी विशेष भूरणनीतिक भौगोलिक स्थिति है। इस क्षेत्र में सहयोगियों के रूप में, एक दूसरे की प्रगति एवं संपन्नता में हमारे साझा हित हैं। और इसलिए, हमने हिन्द प्रशांत क्षेत्र के लिए साझे दृष्टिकोण और सिद्धांतों पर सहमति की है।

-उन्होंने कहा कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति के साथ ‘सागर’ (क्षेत्र में सबके लिए सुरक्षा एवं विकास) का हमारा वित्रन राष्ट्रपति श्री विदोडो की मैरीटाइम फलक्रम नीति से साथ मेल खाता है।

– पीएम मोदी ने कहा, ‘हमारे बीच हुए समझौतों से हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी। मुझे प्रसन्नता है कि हमने अपनी साझेदारी को समग, सामरिक साझेदारी के रूप में उन्नयन करने का निर्णय लिया है। हम वर्ष 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर के स्तर तक ले जाने के लिए अपने प्रयास दोगुने करेंगे।’ दोनों देशों के बीच जिन दस्तावेत्रों पर हस्ताक्षर हुए हैं उनमें दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित रक्षा सहयोग समझौता, बाह्यू अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए दोहन एवं उपयोग, वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग, रेलवे के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग, स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग, औषधीय, जैविक एवं प्रसाधनों की नियामक कार्यप्रणाली, थिंक टैंकों के बीच नीतिगत मसलों पर संवाद बढ़ने, प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण, दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70वीं वर्षगांठ पूरी होने के मौके पर कार्यक्रमों के आयोजन के करार शामिल हैं।

– इंडोनेशिया समेत 163 देशों में हमने लोगों को ई-वीज़ा की सुविधा दे दी है. भारत आने वाले लोगों में 150 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. पहले की सरकारें सीना जोड़कर कहा करती थीं कि हमने ये कानून बनाया-वो कानून बनाया. बीते वर्षों में हमने 1400 पुराने कानूनों को खत्म कर दिया – पीएम मोदी

– हमारी सरकार की पहली प्राथमिकता भ्रष्टाचार को खत्म करना है।

– पीएम ने कहा, ‘जिस प्रकार सवा सौ करोड़ भारतीयों ने मुझ जैसे एक साधाराण नागरिक को प्रधान सेवक बनने का मौका दिया, वैसे ही इंडोनेशिया की जनता ने राष्ट्रपति विडोडो को चुना।’

– भारत और इंडोनेशिया का रिश्ता 1700साल पुराना है। रामायण और महाभारत इंडोनेशिया के जीवन में बसा है।इंडोनेशिया में रामकथा को नए रूप में देखा। हमारा संस्कृत और संस्कृति का रिश्ता है। इंडोनेशिया भारत का सबसे करीबी पड़ोसी देश है : पीएम मोदी

– इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस में भारत की रैंकिग सुधरी : पीएम मोदी

– ASEAN में इंडोनेशिया की भूमिका सराहनीय है: पीएम मोदी

भारत में कई लाख करोड़ का निवेश हो रहा है : पीएम मोदी

– भारत-इंडोनेशिया समाजिक विविधता का प्रतीक हैं: पीएम मोदी

– रमज़ान में भव्य स्वागत से दुल खुश हुआ: पीएम मोदी

– आप सब इंडोनेशिया के नागरिक हैं लेकिन आपके दिल में कहीं न कहीं भारत भी बसा हुआ है: पीएम मोदी

– मोदी, विदोदो गए इस्तिकलाल मस्जिद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान आज इस्तिकलाल मस्जिद गए। यह दक्षिण – पूर्व एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद है ।

मस्जिद जाते समय प्रधानमंत्री मोदी के साथ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विदोदो भी थे। इंडोनेशिया की आजादी की याद में इस मस्जिद का निर्माण किया गया और लोगों के लिए इसे 1978 में खोला गया था।

मोदी ने एक ट्वीट में कहा , ‘‘ दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद में से एक, इस्तिकलाल मस्जिद जाकर बहुत प्रसन्न हूं। ’’

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया , ‘‘ रमदान करीम। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विदोदो के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रमजान के महीने में इंडोनेशिया की राष्ट्रीय मस्जिद और एक्षिण पूर्व एशिया में सबसे बड़ी इस्तिकलाल मस्जिद गए। ’’

क्षमता के हिसाब से यह सुन्नियों की तीसरी सबसे बड़ी मस्जिद है। अरबी शब्द इस्तिकलाल का मतलब होता है आजादी।

पूर्व में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और बिल क्लिंटन , ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स , जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और सउदी अरब के शाह सलमान इस मस्जिद में जा चुके हैं ।

इंडोनेशिया विश्व की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है । इसके बाद पाकिस्तान और भारत का नंबर आता है ।

मोदी और जोको विदोदो ने पतंगबाजी में आजमाया हाथ 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विदोदो ने जकार्ता के राष्ट्रीय स्मारक में भारत के महाकाव्यों रामायण और महाभारत की थीम पर पहली बार आयोजित संयुक्त ‘ पतंग प्रदर्शनी ’ का उद्घाटन कर पतंगबाजी में हाथ आजमाया। दोनों नेताओं ने भारत और इंडोनेशिया के बीच सभ्यता संबंधी मजबूत रिश्तों को दर्शाने वाली ‘ पतंग प्रदर्शनी ’ में भाग लिया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया , ‘‘ सांस्कृतिक संबंधों ने आसमान छू लिया। रामायण की थीम वाली संयुक्त पतंग प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया … अहमदाबाद और जकार्ता पतंग संग्रहालयों ने एमओयू (सहमति पत्रों) का आदान प्रदान किया। ’’

उन्होंने मोदी और विदोदो के प्रदर्शनी में पतंग उड़ाने की तस्वीर साझा करते हुए ट्वीट किया , ‘‘ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोको विदोदो मिलकर संबंधों को नई ऊंचाइयों पर लेकर जा रहे हैं। ’’

प्रदर्शनी की थीम के अनुरूप कई पतंगों पर भगवान राम , रावण का वध करते भी नजर आए।  रामायण की थीम को इंडोनेशियाई आयोजकों और महाभारत की थीम को भारतीय आयोजकों ने डिजाइन किया है।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा गया , ‘‘ दोनों नेताओं ने जकार्ता के लयांग – लयांग संग्रहालय और अहमदाबाद के पतंग संग्रहालय के बीच हुए समझौते का स्वागत किया। साथ ही दोनों ने जकार्ता के राष्ट्रीय स्मारक में रामायण और महाभारत की थीम पर आधारित पहली संयुक्त पतंग प्रदर्शनी की सराहना भी की। ’’

मोदी पूर्वी एशिया के तीन देशों की अपनी यात्रा के पहले चरण में कल इंडोनिशया की राजधानी जकार्ता पहुंचे थे। इंडिया की ‘ एक्ट ईस्ट पॉलिसी ’ को मजबूत करने के लिए इस दौरान मोदी मलेशिया और सिंगापुर भी जाएंगे।

– भारत व इंडोनेशिया हिंद प्रशांत क्षेत्र की महत्ता पर दिया जोर 

भारत व इंडोनेशिया ने आज मुक्त , पारदर्शी , शांतिपूर्ण व नियम आधारित हिंद प्रशांत क्षेत्र की महत्ता पर जोर दिया। दोनों देशों ने यह जरूरत ऐसे समय में रेखांकित की है जबकि चीन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पूर्वी व दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य ताकत दिखा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोका विदोदो ने हिंद – प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग साझा दृष्टिकोण जारी किया है। किसी भी आसियान देश के साथ यह अपनी तरह का पहला दस्तावेज है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि यह दस्तावेज समुद्री सहयोग के क्षेत्रों को रेखांकित करता है तथा हिंद प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा ढांचे पर विचार करता है।

इस दस्तावेज में ‘ मुक्त , पारदर्शी , नियम आधारित , शांतिपूर्ण , संपन्न व समावेशी हिंद प्रशांत क्षेत्र ’ की महत्ता को रेखांकित किया गया है जहां संप्रभुता व क्षेत्रीय अंखडता , नौवहन की आजादी , सतत विकास का सम्मान किया जाए।

उल्लेखनीय है कि यह दस्तावेज ऐसे समय में जारी कि या गया है जबकि चीन इस इलाके में अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है। चीन दक्षिणी चीन सागर पर अपना दावा करता है लेकिन वियतनाम , मलेशिया , फिलीपीन , ब्रूनेई व ताइवान के भी क्षेत्र को लेकर अपने अपने दावे हैं।

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