अनिल देशमुख पर लगा 50 हजार रुपये का जुर्माना, मुख्यमंत्री कोविड-19 राहत कोष में करना होगा जमा, जानिए पूरा मसला

महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार में पूर्व गृह मंत्री रहे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख पिछले काफी दिनों से मुश्किलों का सामना कर रहे है। ऐसे में देशमुख की परेशानियां में और इजाफा हुआ है।

महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार में पूर्व गृह मंत्री रहे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख पिछले काफी दिनों से मुश्किलों का सामना कर रहे है। ऐसे में देशमुख की परेशानियां में और इजाफा हुआ है। देशमुख के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहे एक आयोग ने मामले की सुनवाई स्थगित करने के उनके अनुरोध को लेकर मंगलवार को उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया। 
आयोग के समक्ष जैसे ही मामला सुनवाई के लिए आया, देशमुख की कानूनी टीम के एक कनिष्ठ वकील ने स्थगन का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ वकील एक अन्य मामले में व्यस्त होने के कारण आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हो सकते।  
इससे पहले भी लगा था 15 हजार का जुर्माना 
आयोग ने आखिरी मौका देते हुए मामले की सुनवाई बुधवार दोपहर 12.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। आयोग ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और राशि मुख्यमंत्री के कोविड-19 राहत कोष में जमा कराने का निर्देश दिया। आयोग ने इस महीने की शुरुआत में भी देशमुख पर सुनवाई स्थगन का अनुरोध करने के लिए 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया था।  
महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह द्वारा देशमुख के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए इस साल मार्च में न्यायमूर्ति केयू चांदीवाल आयोग का गठन किया था। बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे अभी एकल सदस्यीय आयोग के समक्ष गवाही दे रहे हैं। उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास के पास विस्फोटक सामग्री बरामद होने के बाद सिंह का मार्च में मुंबई पुलिस आयुक्त के पद से स्थानांतरण कर दिया गया था। सिंह ने आरोप लगाया था कि देशमुख ने पुलिस अधिकारियों से बार एवं रेस्तरां से हर महीने 100 करोड़ रुपये एकत्र करने को कहा था। 
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी सिंह द्वारा देशमुख के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच कर रहे हैं। देशमुख ने इस साल अप्रैल में राज्य के गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था और उन्हें ईडी ने धनशोधन के एक मामले में गिरफ्तार किया था। वह अभी न्यायिक हिरासत में हैं।

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