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Mangaluru Blast : कर्नाटक पुलिस ने तमिलनाडु में कई स्थानों पर की छापेमारी, लोगों को किया तलब

मंगलुरु विस्फोट मामले की जांच तहत कर्नाटक पुलिस ने तमिलनाडु में कई जगहों पर छापेमारी की और कई लोगों को तलब किया।

कर्नाटक में हाल ही में हुए मंगलुरु विस्फोट मामले की जांच के तहत कर्नाटक पुलिस ने तमिलनाडु में कई जगहों पर छापेमारी की और कई लोगों को तलब किया। पुलिस मुख्य आरोपी मोहम्मद शरीक के राज्य में आने-जाने और ठहरने की जांच के लिए तमिलनाडु पहुंची। उन्होंने कोयंबटूर में उस हवेली के मालिक कामराजू को तलब किया है, जहां शरीक ठहरा था। पुलिस के मुताबिक, शरीक फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल करता था और किराए के घर में रह रहा था। कामराजू को तीन दिनों के भीतर मंगलुरु पुलिस के सामने पेश होना है। पुलिस टीम ने मदुरै के नेताजी रोड स्थित लॉज के प्रबंधक से भी पूछताछ की है, जहां मंगलुरु विस्फोट का अपराधी रुका था। पुलिस ने आरोपी की फोन डिटेल खंगाल कर लॉज की पहचान की।
आरोपी ने असम के प्रवासी मजदूर के नंबर से किया था कॉल 
तमिलनाडु पुलिस के एक सूत्र, जो कर्नाटक पुलिस के साथ विभिन्न स्थानों पर तलाशी और छापेमारी में भी शामिल थे, उन्होंने कहा कि वह मदुरै और नागरकोइल में कुछ लोगों से मिला था। ज्ञात हो कि, आरोपी ने तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले में एक असमिया प्रवासी श्रमिक के फोन नंबर से कॉल किया था। पुलिस ने प्रवासी मजदूर को हिरासत में लिया और पूछताछ की लेकिन उसे छोड़ दिया गया, क्योंकि उसका आरोपी से कोई संबंध नहीं था। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि शरीक ने अपने मोबाइल फोन पर व्हाट्सएप डिस्प्ले पिक्चर (डीपी) के रूप में कोयम्बटूर की प्रतिष्ठित आदियोगी प्रतिमा की तस्वीर क्यों लगाई थी। सवाल यह उठता है कि, क्या यह पुलिस को गुमराह करने के लिए था या यह दुनिया को अपने लक्ष्य के बारे में बताने का उसका तरीका था।
पुलिस ने मकान मालिकों, लॉज और गेस्ट हाउस के मालिकों को सतर्क रहने को कहा
भारत में इस्लामवादी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध के बाद कोयंबटूर और मंगलुरु में लोन वुल्फ हमलों की दो घटनाओं ने खुफिया एजेंसियों को उन व्यक्तियों पर विस्तार से ध्यान केंद्रित करने पर मजबूर कर दिया है, जिन्हें पहले हिंसा की घटनाओं में छोड़ दिया गया था। पुलिस ने पहले से ही मकान मालिकों, लॉज और गेस्ट हाउस के मालिकों को सतर्क कर दिया है कि, जो लोग कमरा ले रहे हैं उनके पहचान पत्रों को ठीक से सत्यापित करें और कुछ भी संदिग्ध पाए जाने पर अधिकारियों को सूचित करें।

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