कांग्रेसी सांसदों समेत गांव बादल में बादलों की रिहायश का घेराव, पुलिस लाठीचार्ज के दौरान प्रधान समेत 4 जख्मी

कृषि में सुधार के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 3 अध्यादेशों के खिलाफ आज भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के नेतृत्व में किसान मजदूर कार्यकर्ताओं ने पंजाब के तमाम सियासी पार्टियों से जुड़े सासंदों की रिहायश का घेराव किया।

लुधियाना-मंडी किलयांवाली : कृषि में सुधार के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 3 अध्यादेशों के खिलाफ आज भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के नेतृत्व में किसान मजदूर कार्यकर्ताओं ने पंजाब के तमाम सियासी पार्टियों से जुड़े सासंदों की रिहायश का घेराव किया। इस दौरान अमृतसर में कांग्रेसी लोकसभा सदस्य गुरजीत सिंह ओजला की कोठी का घेराव किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में शामिल हुए किसान – मजदूर और महिलाओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए भड़ास निकाली। एक देश एक मंडी बनकर कॉरपोरेट जगत के हवाले करने के लिए कृषि सुधारों के नाम पर किए गए तीनों अध्यादेशों और बिजली संशोधन बिल 20-20 के विरूद्ध अलग-अलग किसान-मजदूर प्रक्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा जन विरोधी अध्यादेश रदद किए जाने की मांग रखी। 
कृषि अध्यादेश के खिलाफ और बिजली संशोधन बिल के संशोधन के खिलाफ बादलों के रिहायश का घेराव करते समय सुरक्षा के दौरान मोजूद पंजाब पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के दौरान 4 कार्यकर्ता जख्मी हुए है। गुरू हरसहाय के प्रधान धर्म सिंह के सिर पर चोट लगी बताई जा रही है। संघर्ष कमेटी के सैकड़ों कार्यकर्ता धारा 144, कोरोना महामारी की सख्ती होने के बावजूद बड़ी संख्या में प्रर्दशन के दौरान पहुंचे हुए थे। हालांकि पुलिस प्रशासन ने भारी फोर्स तैनात की हुई थी और समस्त बादल के गांव को पुलिस छावनी में बदल रखा था फिर भी सरकारी रूकावटों को नजरअंदाज करके कार्यकर्ताओं ने बादलों की रिहायश पर पहुंचकर प्रदर्शन किया और बठिण्डा- खियोवाली सडक़ पर धरना लगाया। 
उधर लोइयाखास में भी किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने डीएसपी शाहकोट वरिंद्र पाल सिंह और शाहकोट के थाना प्रमुख सुरिंद्र कुमार द्वारा लगाई गई भारी फोर्स को नजरअंदाज करके जालंधर शहर में पहुंचकर प्रदर्शन किया। किसान जिला जालंधर के सांसद चौधरी संतोख सिंह के रिहायश का घेराव करने जा रहे थे। आज भारी वर्षा होने के बावजूद अमृतसर के सांसद गुरजीत सिंह ओजला की रिहायश के नजदीक किसान-मजदूर और महिलाओं ने शिरकत की और पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पंजाब के मजदूर व किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक काला कानून वापिस नहीं होगा, उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि पहले ही केवल 6 फीसदी सरकारी खरीद कृषि उत्पादों की होती है जबकि 94 फीसदी खरीद निजी हाथों में है। किसानों का आरोप था कि मोदी सरकार विश्व परिवार संस्था के दबाव में कृषि सेक्टर पर कारपोरेट का कब्जा करवा रही है जो होने नहीं दिया जाएंगा। संघर्ष कर रहे किसान मजदूर नेताओं ने कांग्रेस प्रधान सोनिया गांधी के नाम भी चिटठी भेजी कि वह मोदी सरकार द्वारा लाए जा रहे अध्यादेशों के खिलाफ विरोध करें और मजदूर की आवाज बुलंद रखें।
– सुनीलराय कामरेड

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

fourteen + sixteen =

पंजाब केसरी एक हिंदी भाषा का समाचार पत्र है जो भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के कई केंद्रों से प्रकाशित होता है।