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स्वामी प्रसाद मौर्य के बिगड़े बोल: संतों-धर्माचार्यों को बताया आतंकवादी और जल्लाद

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्या एक बार फिर विवादों से घिरते नजर आ रहे है। मौर्य द्वारा रामचरितमानस पर की गई टिप्पणी से उठा भूचाल थमा ही नहीं था कि फिर उन्होंने हिंदू धर्म के संतों तथा धर्माचार्यों पर निशाना साधा है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्या एक बार फिर विवादों से  घिरते नजर आ रहे है। मौर्य द्वारा रामचरितमानस पर की गई टिप्पणी से उठा भूचाल थमा ही नहीं था कि फिर उन्होंने हिंदू धर्म के संतों तथा धर्माचार्यों पर निशाना साधा है। बीते दिनों सपा नेता ने तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के कुछ हिस्सों पर यह कहते हुए पाबंदी लगाने की मांग की थी कि इस ग्रंथ के कुछ पंक्तियों में विभिन्न जातियों का नाम लिया गया है। इससे इन जातियों के लोगों की भावनाएं आहत हो रही है। साथ ही पूर्व मंत्री ने रामचरितमानस के आपत्तिजनक अंश पर बैन लगाने की मांग की थी। मौर्य का कहना है कि रामचरितमानस की इन पंक्तियों से  समाज के एक बड़े तबके का जाति, वर्ण और वर्ग के आधार पर अपमान होता है।

स्वामी प्रसाद मौर्या के इस विवादास्पद बोल का तमाम हिन्दू संगठनों ने विरोध किया। जिसपर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि अभी हाल में मेरे दिये गये बयान पर कुछ धर्म के ठेकेदारों ने मेरी जीभ काटने एवं सिर काटने वालों को इनाम घोषित किया है, अगर यही बात कोई और कहता तो यही ठेकेदार उसे आतंकवादी कहते, किंतु अब इन संतों, महंतों, धर्माचार्यों व जाति विशेष लोगों को क्या कहा जाए आतंकवादी, महाशैतान या जल्लाद। उन्होंने कहा कि देश की महिलाओं, आदिवासियों, दलितों एवं पिछड़ों के सम्मान की बात क्या कर दी, मानो भूचाल आ गया। एक-एक करके संतो, महंतों, धर्माचार्यों का असली चेहरा बाहर आने लगा। सिर, नाक, कान काटने पर उतर आये। कहावत सही है कि मुंह में राम बगल में छुरी। धर्म की चादर में छिपे, भेड़ियों से बनाओ दूरी।
दलित-मुस्लिम समुदाय को लुभाने में जुटी सपा 
माना जा रहा है कि मौर्य द्वारा हिन्दू धर्म को टार्गेट करने का उद्देश्य एक खास वर्ग को अपने पाले में करना है। उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी फिर एक बार अपने पुराने सियासी तालमेल को बिठाने का प्रयास कर रही है। जिसमें दलित और मुस्लिम समुदाय को खास तवज्जो दी रही है। सपा इसी गठजोड़ को तोड़ने के प्रयास में लगी है। माना जा रहा है कि  अखिलेश समर्थकों द्वारा दिए जा रहे इस तरह के बयान भी इसी क्रम का हिस्सा है। वहीं भाजपा ने भी स्वामी प्रसाद मौर्य पर पलटवार करते हुए उन्हें सपरिवार इस्लाम स्वीकारने की सलाह दी है। सलेमपुर से भाजपा के सांसद रविंद्र कुशवाहा ने शुक्रवार को कहा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य, परिवार के साथ तत्काल इस्लाम धर्म स्वीकार कर लें और अपनी पुत्री संघमित्रा से लोकसभा की सदस्यता और भाजपा से तत्काल त्यागपत्र दिला दें। बता दें कि गत वर्ष स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे। 
 

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