Gyanvapi Case: ज्ञानवापी मामले ने लिया दिलचस्प मोड़… विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत ने किया यह बड़ा दावा!

काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद में जारी विवाद के बीच इस मामले ने अब एक नया दिलचस्प मोड़ ले लिया है।

काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद में जारी विवाद के बीच इस मामले ने अब एक नया दिलचस्प मोड़ ले लिया है, दरअसल काशी विश्वनाथ मंदिर के एक पूर्व महंत ने दावा किया है कि वजूखाने के भूतल में शिवलिंग मौजूद है। उनके मुताबिक भूतल में विश्वेश्वर महादेव हैं, यही कारण है कि तिवारी ने ये मांग भी की है कि काशी विश्वनाथ धाम परिसर में नंदी के मुख के सामने जो दरवाजा है उसे खुलवाकर बाबा विश्वेश्वर महादेव की पूजा करने दी जाए। 
वहीं पूर्व महंत तिवारी के इस दावे को अंजुमन इंतिज़ामिया मस्जिद (एआईएम) की प्रबंधन समिति के एक पदाधिकारी ने “निराधार” बताते हुए उसे खारिज कर दिया। तिवारी का बयान ऐसी वक्त आया है जब ज्ञानवापी मस्जिद में हुए सर्वे के दौरान वजूखाने में कुएं के अंदर एक शिवलिंग मिलने का दावा किया जा रहा है।   
पूर्व महंत तिवारी ने ज्ञानवापी को लेकर किया बड़ा दावा 
बता दें कि वीडियो सर्वेक्षण का आदेश 5 महिलाओं द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर रखी गई देवी श्रृंगार गौरी की मूर्ति की रोज बिना रोकटोक के पूजा की मांग को लेकर एक याचिका दायर की थी। वहीं महंत तिवारी ने अपने दावों को साबित करने के लिए 2014 में खींची गई तस्वीरों को दिखाया, उन्होंने कहा “मुझे नहीं पता कि यह शिवलिंग अभी भी उसी स्थान पर मौजूद है या हटा दिया गया है। मैं अधिकारियों से इस मामले में जांच करने की मांग करता हूं।” 1983 में सरकार द्वारा नियुक्त ट्रस्ट द्वारा प्रबंधन संभालने से पहले काशी विश्वनाथ मंदिर के अंतिम सेवारत महंत ने कहा कि दीवारों पर कमल के फूलों और घंटियों के चित्र भी देखे जा सकते हैं।
 2014 में क्लिक की गई तस्वीरें दिखाकर किया बड़ा दावा 
वहीं तिवारी द्वारा दिखाई गई एक अन्य तस्वीर में कुछ बच्चों को ज्ञानवापी परिसर के उस हिस्से में खेलते देखा जा सकता है जहां श्रृंगार गौरी का मंदिर स्थित है। उन्होंने दावा किया कि तस्वीर में ज्ञानवापी ढांचे की पिछली दीवार साफ दिखाई दे रही है, जो किसी प्राचीन मंदिर के दिवार की तरह लगती है। तिवारी ने कहा कि ज्ञानवापी का अर्थ है ‘ज्ञान का कुआं’, वजू तालाब का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस तालाब के पीछे नंदी और हनुमान की मूर्ति दिखाई दे रही है। इस तालाब में स्नान के बाद देवी पार्वती भगवान विश्वेश्वर (शिव का दूसरा नाम) की पूजा करती थीं।” 
उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण के दौरान मिले शिवलिंग की पूजा लोगों को करने देने के लिए वह सोमवार को याचिका दायर करेंगे। उनका दावा है कि उनके पास 2014 में क्लिक की गई तस्वीरें हैं। तिवारी के दावे का खंडन करते हुए एआईएम के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने कहा, ‘उनका दावा निराधार है। ज्ञानवापी परिसर की दीवार पर कोई ‘चित्र’ नहीं है। हम नहीं जानते कि वह किस तस्वीर के बारे में बात कर रहे हैं, ”उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि लोगों को निराधार दावे करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे शांति और सद्भाव भंग हो सकता है।

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