UP: राजनीतिक दलों के धोखे के बाद किसानों ने लिया फैसला, विधानसभा चुनाव में करेंगे ‘NOTA’ का इस्तेमाल

शामली जिले के एक गांव के निवासियों के बाद, अब लखीमपुर खीरी के किसानों ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में नोटा विकल्प का उपयोग करने का फैसला किया है।

उत्तर प्रदेश में सियासी घमासान जोरो पर है, ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी तरफ से चुनावी संग्राम को तेज करने में जुटे हुए है। लेकिन इसी बीच देश के अन्नदाता, किसानों ने एक बड़ा ऐलान किया है। शामली जिले के एक गांव के निवासियों के बाद, अब लखीमपुर खीरी के किसानों ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में नोटा विकल्प का उपयोग करने का फैसला किया है। 
किसानों ने कहा कि वे विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा दिए गए धोखे के बाद ऐसा करने जा रहे है। स्थानीय किसान गुरविंदर सिंह ने कहा कि कुछ पार्टियों ने हमें धोखा दिया है जबकि अन्य अप्रभावी साबित हुए हैं। 
हमें किसी भी राजनीतिक दल से कोई उम्मीद नहीं 
उन्होंने कहा कि हमें किसी भी राजनीतिक दल से कोई उम्मीद नहीं है। भाजपा, सपा, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस ने उन्हें झूठे आश्वासन दिए और चुनाव के दौरान हमें वस्तुओं के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं। 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी के तिकुनिया गांव में किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। 
केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी का बेटा मुख्य आरोपी 
मामले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को मुख्य आरोपी बनाया गया है और वह जेल में है। वी.एम. राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के प्रमुख सिंह ने आरोप लगाया कि सपा और भाजपा ने किसानों को धोखा दिया है। उन्होंने कहा कि सपा-राष्ट्रीय लोक दल गठबंधन और भाजपा किसानों को बेवकूफ बना रहे हैं। हम उनमें से किसी एक का समर्थन क्यों करें? तराई बेल्ट में स्थित लखीमपुर खीरी जिले में किसान आबादी का बड़ा हिस्सा हैं।

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