Crude Oil Prices Hike: US-इजरायल और ईरान के बीच भीषण हमले ने पूरी दुनिया समेत मिडिल ईस्ट में मुश्किलें बढ़ा दी है और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य टकराव औप मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत का बंपर उछाल आया है। साथ ही बताया जा रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य रोकने से ब्रेंट क्रूड 90 डालर प्रति बैरल स ऊपर चढ़ सकता है या बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में 100 डॉलर प्रति बैरल से भी अधिक हो सकता है।
Crude Oil Prices Hike

कच्चे तेल की कीमत पहले ही लगभग 72.8 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है और सीमित जवाबी कार्रवाई से इसमें 5-10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि ईरानी तेल बुनियादी ढांचे को नुकसान से इसमें 10-12 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हो सकती है। बढ़ते कच्चे तेल के भाव का असर भारत में भी देखने को मिल सकता है और माना जा रहा है कि कच्चे तेल की कीमत में प्रत्येक 1 डॉलर की बढ़ोतरी के साथ भारत का वार्षिक आयात बिल लगभग 2 अरब डॉलर बढ़ जाता है, जिससे व्यापार संतुलन पर दबाव पड़ता है।
India Crude Oil Import
वैश्विक तेल प्रवाह का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जिसमें भारत के कच्चे तेल के आयात का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी मार्ग का उपयोग करता है। भविष्य में बाजारों के आय-आधारित कारोबार से तेल-आधारित कारोबार की ओर बढ़ने की संभावना है। तेल से प्रभावित क्षेत्र जैसे तेल उत्पादक कंपनियां, पेंट, टायर, विमानन और रसायन क्षेत्रों में मार्जिन पर दबाव रहेगा। मौजूदा आर्थिक तनाव में भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चा तेल प्रमुख मैक्रो वेरिएबल बना हुआ है।
Hormuz Strait Impact on India

ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 78.52 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों पर बाजारों की प्रतिक्रिया के रूप में कीमतों में तेज वृद्धि को दर्शाता है। बता दें कि वैश्विक तेल खपत का लगभग पाँचवाँ हिस्सा लगभग 20-22 मिलियन बैरल प्रतिदिन होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इस महत्वपूर्ण मार्ग रोकने से बीमा प्रीमियम, माल ढुलाई लागत और कच्चे तेल के मानकों को बढ़ा देते हैं। समुद्री यातायात बाधित होने की स्थिति में कीमतें 120-140 अमेरिकी डॉलर तक जा सकती हैं, जबकि लंबे समय तक समुद्री रास्ता बंद रहने का जोखिम तेल की कीमत को 150 अमेरिकी डॉलर या उससे भी अधिक तक पहुंचा सकता है।
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