भारत का Coal Production लक्ष्य बढ़ा, जानें कितनी हुई वृद्धि?

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Coal Production: भारत सरकार ने घरेलू कोयला उत्पादन (Coal Production) को बढ़ावा देने के लिए वित्त वर्ष 2030 तक कोयला उत्पादन का लक्ष्य 1.13 बिलियन टन तक बढ़ा दिया है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राज्यसभा में बताया कि इस दिशा में कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) को भी बड़ी ज़िम्मेदारी दी गई है। CIL को वित्त वर्ष 2026-27 तक 1 बिलियन टन कोयला उत्पादन करने का लक्ष्य सौंपा गया है। 2023-24 में रिकॉर्ड Coal Production पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत ने पहली बार 1 बिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन कर एक नया रिकॉर्ड बनाया।…

Coal Production: भारत सरकार ने घरेलू कोयला उत्पादन (Coal Production) को बढ़ावा देने के लिए वित्त वर्ष 2030 तक कोयला उत्पादन का लक्ष्य 1.13 बिलियन टन तक बढ़ा दिया है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राज्यसभा में बताया कि इस दिशा में कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) को भी बड़ी ज़िम्मेदारी दी गई है। CIL को वित्त वर्ष 2026-27 तक 1 बिलियन टन कोयला उत्पादन करने का लक्ष्य सौंपा गया है।

2023-24 में रिकॉर्ड Coal Production

पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत ने पहली बार 1 बिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन कर एक नया रिकॉर्ड बनाया। कोल इंडिया ने अकेले ही इस वर्ष 781.07 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 0.94% अधिक है।

कुल लक्ष्य: 2030 तक 1.5 बिलियन टन

सरकार का अनुमान है कि 2030 तक देश का कुल Coal Production लक्ष्य 1.5 बिलियन टन तक पहुंच सकता है। इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता को कम करते हुए घरेलू ज़रूरतों को स्वदेशी स्रोतों से पूरा करना है। आने वाले वर्षों में कोयला उत्पादन में 6-7% की सालाना वृद्धि की संभावना जताई गई है।

Coal Production

Coal आयात में कमी की योजना

हालांकि भारत अभी भी कुछ Coal का आयात करता है, पर यह मुख्य रूप से कोकिंग कोल और उच्च गुणवत्ता वाले गैर-कोकिंग कोल तक सीमित है, जिनका घरेलू उत्पादन सीमित है। सरकार की योजना है कि इस आयात को भी धीरे-धीरे कम किया जाए।

Coal Production
Coal Production

घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए उठाए गए कदम

भारत सरकार ने Coal Production बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं:

  • एकल खिड़की मंजूरी प्रणाली लागू की गई है जिससे खनन परियोजनाओं को मंजूरी देना आसान हो गया है।
  • कैप्टिव खदानों को 50% उत्पादन बेचने की अनुमति दी गई है, जिससे वे खदान से अतिरिक्त कोयला खुले बाज़ार में बेच सकते हैं।
  • वाणिज्यिक खनन के लिए कोयला ब्लॉकों की नीलामी की जा रही है, जिसमें विदेशी निवेश की अनुमति 100% तक दी गई है।
  • राजस्व साझेदारी मॉडल पर आधारित कोयला ब्लॉकों की नीलामी 2020 में शुरू हुई, जिसमें पूर्व निर्धारित समय से पहले उत्पादन करने पर 50% छूट दी जाती है।
  • कोल इंडिया भी उत्पादन बढ़ाने के लिए तकनीकी सुधार, परियोजनाओं के विस्तार और नई खदानों के विकास पर काम कर रहा है।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।