नई दिल्ली : दिल्ली में बदलते मौसम ने पटाखे व्यापारियों की समस्या बढ़ा दी है। कोर्ट के सख्त रुख और पटाखे से होने वाली प्रदूषण को देखते हुए आ रही जागरूकता से पटाखा व्यापारियों का व्यापार मंदा हो गया है। दीपावली नजदीक आने के बावजूद सदर बाजार में पटाखा व्यापार काफी मंदा है।
हालत यह है कि व्यापार न होने के कारण यहां के पटाखा व्यापारी इस कारोबार से अब मुंह मोड़ने लगे हैं। इस संबंध में व्यापारियों का कहना है कि पिछले वर्ष कोर्ट के अचानक फैसले के कारण सदर बाजार के 70 पटाखा व्यापारियों को कारोबार में करोड़ो का नुकसान सहना पड़ा था। फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार यादव ने बताया कि पिछले साल सदर बाजार में पटाखों की 72 दुकानों को लाइसेंस दिया गया था। इनमें से दो दुकानों को स्थायी लाइसेंस मिला हुआ है।
यह लाइसेंस दिल्ली पुलिस ने दिया था। लाइसेंस मिलते ही दुकानदारों ने लाखों रुपए के पटाखे दुकान में भर दिये। लेकिन तीन दिन बाद ही कोर्ट ने पटाखा पर बैन लगा दिया। अचानक इस फैसले से व्यापारियों को नुकसान हुआ। यदि कोई ऐसा फैसला लेना हो तो लाइसेंस न जारी किया जाए।
देशभर में पटाखा बेचना हो बैन… एसोसिएशन अध्यक्ष राकेश कुमार ने बताया कि पटाखा चलाना सनातन धर्म में परंपरा नहीं रहा है। इसे हमलोगों ने ही बढ़ावा दिया है। भगवान श्रीराम जब लंका जीतकर आये थे तब लोगों ने दीया जलाकर प्रकाश पर्व बनाया था। उन्होंने कोर्ट व सिविक एजेंसियों से निवेदन किया है कि पटाखा चलाने से अत्यधिक प्रदूषण वायु में फैलता है, जो हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में देशभर में पटाखा बैन होना चाहिए। सदर बाजार में कुल 40 हजार दुकानें हैं। दीपावली के समय कई बार पटाखे से दुकानों में आग की घटनाएं हो चुकी हैं। इससे आसपास की कई दुकानें भी इसके चपेट में आ गए हैं और लाखों का नुकसान हुआ है।
व्यापारियों का उत्साह खत्म
कुतुब रोड रेजीडेंट एसोसिएशन, सदर बाजार के महासचिव राजेन्द्र कुमार गुप्ता ने बताया कि कुतुब रोड पर पिछले साल कुछ 20 पटाखे की दुकानों को लाइसेंस दिया गया था। लेकिन कोर्ट के फरमान के बाद व्यापारियों का इस कारोबार से उत्साह खत्म हो गया है। दीपावली हमलोगों का सबसे बड़ा त्योहार है। उन्होंने कहा प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार के पास कोई रोडमैप तैयार नहीं है। जब सरकार को पता है कि दीपावली के आसपास आबोहवा खराब हो जाती है तो पहले ही इससे निबटने की तैयारी क्यों नहीं करते। इसका खामियाजा व्यापरियों को भुगतना पड़ता है।


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